सरकारी जमीनों पर नहीं चलेगी मनमानी! अब तीन सदस्यीय विशेष पीठ करेगी जमीन से जुड़े वादों की सुनवाई
योगी सरकार का बड़ा फैसला, ग्राम सभा, सरकारी, नजूल, निष्क्रांत और शत्रु संपत्ति से जुड़े सभी पुराने और नए वाद अब सिर्फ थ्री-मेंबर बेंच में, हर बुधवार होगी नियमित सुनवाई
लखनऊ, 4 जुलाई 2026:
यूपी में सरकारी और सार्वजनिक भूमि से जुड़े विवादों के त्वरित, निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए योगी सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राजस्व परिषद ने आरक्षित श्रेणी की भूमि, शासकीय भूमि, ग्राम सभा, नजूल, निष्क्रांत संपत्ति तथा शत्रु संपत्ति (यदि कोई हो) से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई अब तीन सदस्यीय विशेष पीठ (थ्री-मेंबर बेंच) से कराने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री लगातार सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने, भूमि विवादों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने और राजस्व न्याय प्रणाली को अधिक पारदर्शी व तकनीक आधारित बनाने पर बल दे रहे हैं। इसी उद्देश्य से उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-9 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह नई व्यवस्था लागू की गई है।
नई व्यवस्था के तहत लखनऊ और प्रयागराज स्थित राजस्व परिषद न्यायालयों में इस श्रेणी के सभी लंबित एवं नए वाद अब केवल विशेष रूप से गठित तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष ही प्रस्तुत किए जाएंगे। इन मामलों की सुनवाई अब न तो एकल पीठ करेगी और न ही सर्किट कोर्ट। दोनों स्थानों पर अलग-अलग विशेष पीठों का गठन किया गया है। यह पीठ हर बुधवार को नियमित रूप से इन मामलों की सुनवाई करेंगी।
राजस्व परिषद ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस श्रेणी के सभी लंबित और नए मामलों की पहचान कर उन्हें विशेष पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कराया जाए जिससे किसी भी मामले के अनावश्यक लंबित रहने की संभावना समाप्त हो सके। सरकार का मानना है कि सामूहिक निर्णय प्रणाली अपनाने से न्यायिक प्रक्रिया अधिक मजबूत, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनेगी। इसके साथ ही समान प्रकृति के मामलों में एकरूप फैसले आने से भविष्य में कानूनी विवाद और असमंजस भी कम होंगे।
योगी सरकार पहले ही डिजिटल भू-अभिलेख, ऑनलाइन नामांतरण, आधुनिक तकनीकों से भूमि पैमाइश और पारदर्शी राजस्व सेवाओं जैसी कई सुधारात्मक पहल कर चुकी है। तीन सदस्यीय विशेष पीठ का गठन इन्हीं सुधारों की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। इससे राजस्व न्याय व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, जवाबदेह तथा आधुनिक बनाने की दिशा में नई गति मिलेगी।






