लखनऊ, 7 जून 2026:
यूपी में दिव्यांगजनों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में संचालित दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान एवं पेंशन योजना लाखों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरी है। इस योजना से प्रदेश के 12 लाख से अधिक पात्र दिव्यांगजन नियमित आर्थिक सहायता प्राप्त कर रहे हैं। इससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
योजना के तहत हर पात्र लाभार्थी को प्रतिमाह 1000 रुपये के हिसाब से सहायता राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जा रही है। समय पर मिलने वाली इस सहायता से दिव्यांगजन अपनी दैनिक जरूरतों, दवाइयों और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा कर पा रहे हैं। कई परिवारों के लिए यह पेंशन आर्थिक संबल के साथ-साथ आत्मसम्मान के साथ जीवन जीने का आधार भी बन गई है।
बाराबंकी निवासी आशा और उनके पति हरिलाल इस योजना के लाभार्थियों में शामिल हैं। आशा एक हाथ से दिव्यांग हैं। हरिलाल गंभीर श्वास संबंधी बीमारी से जूझ रहे हैं। सीमित आय और चार बेटियों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी के बीच परिवार आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा था। हरिलाल बताते हैं कि दिव्यांग पेंशन मिलने से दवा और जरूरी घरेलू खर्च पूरे हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस सहायता ने उनके परिवार को बड़ी राहत दी है। उन्हें आर्थिक मदद के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
इसी तरह लखनऊ के गोसाईगंज निवासी 35 वर्षीय कौशल पिछले पांच-छह वर्षों से योजना का लाभ उठा रहे हैं। बाएं पैर से दिव्यांग कौशल ने बताया कि उन्हें हर तीन महीने में 3000 रुपये की पेंशन मिलती है। इससे उनके जीवन-यापन में काफी मदद मिलती है। उनके अनुसार समय पर मिलने वाली सहायता ने आर्थिक परेशानियों को काफी हद तक कम कर दिया है।
खेती-किसानी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले लखनऊ के लाभार्थी रजनीश इस योजना को बड़ी राहत मानते हैं। उनका कहना है कि खेती से होने वाली सीमित आय के बीच सरकार की ओर से मिलने वाली पेंशन अतिरिक्त सहारे का काम करती है।
प्रदेश सरकार के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में 12 लाख से अधिक पात्र दिव्यांगजनों को इस योजना का लाभ मिला है। सरकार की यह पहल विशेष रूप से उन लोगों के लिए राहत लेकर आई है जिनके पास आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं है और जो अपनी शारीरिक स्थिति के कारण नियमित रोजगार करने में असमर्थ हैं। योजना आर्थिक सहायता प्रदान कर दिव्यांगजनों के जीवन में आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना भी मजबूत कर रही है।






