Lucknow CityUttar Pradesh

Gyan Bharatam Mission : यूपी की दुर्लभ पांडुलिपियों को मिल रही डिजिटल पहचान, 7.56 लाख पन्ने सुरक्षित

UP Manuscript Preservation : गीता प्रेस गोरखपुर से वृंदावन शोध संस्थान तक छह संस्थानों में चल रहा काम, अब तक 15,890 पांडुलिपियों की स्कैनिंग पूरी, 14,594 पांडुलिपियों का मेटाडाटा तैयार, 14,208 रिकॉर्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड, संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, डिजिटल संरक्षण से शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को मिलेगी मदद

लखनऊ, 13 अक्टूबर 2026:

UP News : उत्तर प्रदेश की सदियों पुरानी साहित्यिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए चल रहे Gyan Bharatam Mission के तहत दुर्लभ पांडुलिपियों को डिजिटल रूप दिया जा रहा है। सितंबर 2026 तक प्रदेश के छह प्रमुख संस्थानों में 15,890 पांडुलिपियों से जुड़े 7,56,392 पन्नों की स्कैनिंग पूरी हो चुकी है। इनमें 14,594 पांडुलिपियों का मेटाडाटा तैयार किया गया है, जबकि 14,208 रिकॉर्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए जा चुके हैं।

छह संस्थानों में चल रहा काम

इस अभियान में गीता प्रेस गोरखपुर, नागरी प्रचारिणी सभा, हिंदी साहित्य सम्मेलन, राजकीय पांडुलिपि पुस्तकालय, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और वृंदावन शोध संस्थान शामिल हैं। यहां पांडुलिपियों की पहचान करने, उनके पन्नों को स्कैन करने, मेटाडाटा तैयार करने और डिजिटल रिकॉर्ड अपलोड करने का काम किया जा रहा है।

दावन शोध संस्थान में सबसे ज्यादा पन्नों की स्कैनिंग

मथुरा के वृंदावन शोध संस्थान में अब तक 3,161 पांडुलिपियों के 1,93,256 पन्नों को स्कैन किया गया है। यहां 2,998 पांडुलिपियों का मेटाडाटा तैयार हुआ है, जबकि 2,846 रिकॉर्ड अपलोड किए जा चुके हैं।
हिंदी साहित्य सम्मेलन में 2,400 पांडुलिपियों के 1,26,878 पन्नों की स्कैनिंग पूरी हुई है। यहां 2,090 पांडुलिपियों का मेटाडाटा तैयार किया गया है, जबकि 2,023 रिकॉर्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड हुए हैं।

ये भी पढ़ें:

राजकीय पांडुलिपि पुस्तकालय में 1.52 लाख पन्ने स्कैन

राजकीय पांडुलिपि पुस्तकालय में 1,623 पांडुलिपियों के 1,52,519 पन्नों को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया गया है। यहां 1,472 पांडुलिपियों का मेटाडाटा तैयार हुआ है, जबकि 1,410 रिकॉर्ड अपलोड किए जा चुके हैं। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में 1,192 पांडुलिपियों के 90,300 पन्नों की स्कैनिंग हुई है। यहां 759 पांडुलिपियों का मेटाडाटा तैयार करने के साथ ही इतने ही रिकॉर्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए गए हैं।

Advertisement

gyan-bharatam-mission-up-rare-manuscripts-digitization-7-56-lakh-pages (2)

शोध और अध्ययन में होगी आसानी

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के मुताबिक, इस पहल का मकसद सिर्फ पुराने दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी तैयार करना नहीं है, बल्कि उनमें दर्ज ज्ञान, साहित्य और ऐतिहासिक जानकारी को लंबे समय तक सुरक्षित रखना भी है। इससे आने वाले समय में शोध और अध्ययन के लिए इन दस्तावेजों तक पहुंच आसान हो सकेगी। पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने से पुरानी सामग्री को खराब होने से बचाने में मदद मिलेगी। मेटाडाटा के जरिए हर पांडुलिपि की पहचान और उससे जुड़ी जानकारी दर्ज की जा रही है। इससे दुर्लभ दस्तावेजों को खोजने, उनकी जानकारी जुटाने और अध्ययन के दौरान उनका इस्तेमाल करने में सुविधा होगी।

आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजी जा रही विरासत

मंत्री ने कहा कि Gyan Bharatam Mission के तहत चल रहा यह काम उत्तर प्रदेश की साहित्यिक, धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी पुरानी सामग्री को आधुनिक तकनीक के जरिए सुरक्षित करने की दिशा में अहम पहल है। गीता प्रेस, नागरी प्रचारिणी सभा, हिंदी साहित्य सम्मेलन, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और वृंदावन शोध संस्थान जैसे संस्थानों की पांडुलिपियों के डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से आने वाली पीढ़ियों के लिए यह सामग्री सुरक्षित रहेगी, साथ ही शोध और अध्ययन के नए रास्ते भी खुलेंगे।

ये भी पढ़ें  नेहा सिंह राठौर को मिला एक और नोटिस... अब इस पुलिस ने किया तलब, 7 दिनों के भीतर दर्ज कराना होगा बयान

Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button
Secret Link