लखनऊ, 9 फरवरी 2026:
यूपी विधानसभा के बजट सत्र में प्रदेश सरकार की वर्ष 2025-26 की आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश करते हुए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में हुए बड़े बदलावों की तस्वीर सामने रखी। उन्होंने कहा कि कुछ वर्षों में योजनाबद्ध तरीके से किए गए प्रयासों का असर अब जमीनी स्तर पर साफ दिखाई दे रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच, गुणवत्ता और क्षमता तीनों मोर्चों पर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है।
वित्त मंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 तक प्रदेश में 36 मेडिकल कॉलेज संचालित थे। उनमें 15 राजकीय और 21 निजी मेडिकल कॉलेज शामिल थे। सरकार की प्राथमिकताओं और सतत निवेश के चलते वर्ष 2025 के अंत तक मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 81 हो गई है। इनमें 45 राजकीय और 36 निजी मेडिकल कॉलेज हैं। मेडिकल कॉलेजों की संख्या में वृद्धि से न केवल अलग-अलग क्षेत्रों में बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध हुई है बल्कि हर साल बड़ी संख्या में नए डॉक्टर तैयार हो रहे हैं।
इससे भविष्य में प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। मेडिकल और डेंटल शिक्षा के पाठ्यक्रमों एवं परीक्षाओं में एकरूपता लाने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी राज्य चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्थापना को भी अहम कदम बताया गया। इसका उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को समान मानकों पर लाना है, ताकि प्रदेश के डॉक्टर देशभर में प्रतिस्पर्धी बन सकें।
ग्रामीण और सुदूरवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए मोबाइल मेडिकल यूनिट सेवा किसी वरदान से कम नहीं साबित हो रही है। वर्तमान में प्रदेश के 54 जनपदों में 170 मोबाइल मेडिकल यूनिट संचालित हैं। इनके माध्यम से अब तक 2.05 करोड़ मरीजों का उपचार किया जा चुका है। यह सेवा उन लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचा रही है जिन्हें अस्पताल तक पहुंचने में कठिनाई होती है।
आधुनिक तकनीक के सहारे टेलीमेडिसिन सेवाओं का भी तेजी से विस्तार हुआ है। 11 मई 2021 से शुरू हुई ई-संजीवनी टेली परामर्श सेवा वर्तमान में 26 मेडिकल कॉलेजों में संचालित है। इसके जरिए अब तक 22.53 लाख से अधिक ओपीडी परामर्श दिए जा चुके हैं। इससे मरीजों को घर बैठे विशेषज्ञ चिकित्सकों से सलाह मिलने लगी और समय व खर्च की बचत हो रही है।






