Lucknow City

लखनऊ के नामी स्कूलों के बाहर जाम पर हाई कोर्ट सख्त, CMS, लामार्ट, लोरेटो, जयपुरिया स्कूल को नोटिस

19 जनवरी को अगली सुनवाई, स्कूलों के प्रिंसिपल और प्रशासनिक अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया, कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद यातायात व्यवस्था सुधारने में सहयोग न करने का मामला, ट्रैफिक जाम से लोगों को होती गंभीर परेशानी

लखनऊ, 8 जनवरी 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ में नामी स्कूलों के बाहर लगने वाले भीषण जाम को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने सख्त रुख अपनाया है। स्पष्ट निर्देशों के बावजूद यातायात व्यवस्था सुधारने में सहयोग न करने वाले शहर के प्रमुख स्कूलों को कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए उनके प्रिंसिपल और प्रशासनिक अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी 2026 को होगी।

यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की बेंच ने रिवर बैंक रेजीडेंट्स की ओर से वर्ष 2020 में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि आवासीय क्षेत्रों में संचालित बड़े स्कूलों के कारण रोजाना भारी ट्रैफिक जाम लगता है। इससे स्थानीय निवासियों, मरीजों और स्कूली बच्चों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन स्कूलों को नोटिस जारी किया गया उनमें लामार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज (हजरतगंज), लोरेटो कॉन्वेंट (गौतमपल्ली), सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (विशाल खंड, गोमतीनगर), सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (गोमती नगर एक्सटेंशन), सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (स्टेशन रोड) और सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल (गोमतीनगर) शामिल हैं। कोर्ट ने इन सभी संस्थानों से यह बताने को कहा है कि उन्होंने अपने-अपने स्कूलों के आसपास यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं।

सुनवाई के दौरान न्याय मित्र ने अदालत को अवगत कराया कि कुछ स्कूल न तो प्रशासन के निर्देशों का पालन कर रहे हैं और न ही न्यायालय द्वारा पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों को गंभीरता से ले रहे हैं। ऐसे संस्थानों को पक्षकार बनाकर जवाब तलब किया जाना आवश्यक है।

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न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि स्कूलों को स्वयं पहल करते हुए ट्रैफिक प्रबंधन सुधारने और व्यावहारिक सुझाव देने का अवसर दिया जा रहा है। यदि वे इसमें विफल रहते हैं तो अदालत सख्त आदेश पारित करने से पीछे नहीं हटेगी। इस फैसले को लखनऊ के नागरिकों के लिए राहत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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