Uttar Pradesh

IIT इंजीनियर ने छोड़ा 2 करोड़ का पैकेज, अब UP की गोशालाओं में लगेगा तकनीक का ‘पावर प्लांट’

यूपी बनने जा रहा देश का आधुनिक टेक्नोलॉजी बेस्ड गोसंरक्षण मॉडल स्टेट, गोशालाओं में लगाए जाएंगे बायोगैस प्लांट, गोबर, गोमूत्र और बायोगैस के जरिए युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए द्वार, जालौन के मॉडल को प्रदेश भर में लागू करने की तैयारी

लखनऊ, 8 मार्च 2026:

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के गोसंरक्षण के विजन को अब आधुनिक तकनीक का साथ मिलने जा रहा है।सरकार प्रदेश की 300 से अधिक गोशालाओं में बायोगैस प्लांट स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। इन प्लांटों के माध्यम से गोबर और गोमूत्र से स्वच्छ ऊर्जा, जैविक खाद और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

इस पहल की खास बात यह है कि इसमें तकनीक और युवाओं की ऊर्जा को जोड़ा जा रहा है। इस परियोजना का नेतृत्व यशराज गुप्ता कर रहे हैं। वे आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र हैं। यशराज ने एक प्रतिष्ठित सॉफ्टवेयर कंपनी में मिलने वाला करीब दो करोड़ रुपये का सालाना पैकेज छोड़कर गोसेवा और ग्रामीण विकास से जुड़े इस सामाजिक मिशन को चुना है।

जालौन में यशराज और उनकी टीम ने गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता और आयोग के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर परियोजना की रणनीति तय की। इस योजना की शुरुआत जालौन जिले से की जाएगी। जिले की गोशालाओं में बायोगैस प्लांट स्थापित कर जैविक खाद, बायो-सीएनजी और बिजली उत्पादन की व्यवस्था विकसित की जाएगी।

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गोसेवा आयोग के अध्यक्ष ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर पहली बार वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गोसंरक्षण को आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंचगव्य आधारित उत्पादों को उद्योग से जोड़कर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार किए जाएंगे। यशराज और उनकी टीम ने ‘पंचगव्य वैल्यू चेन’ गोमूत्र, गोबर, दूध, दही और घी के औद्योगिक उपयोग पर प्रशिक्षण देने की भी योजना बनाई है।

इसके तहत गोशालाओं से तैयार उत्पादों की ब्रांडिंग और बाजार में बिक्री की संभावनाओं को विकसित किया जाएगा। सरकार की योजना है कि जालौन में यह मॉडल सफल होने के बाद इसे प्रदेश के 300 से अधिक गोआश्रय स्थलों में लागू किया जाए।

इससे गोआश्रय स्थल केवल पशुधन संरक्षण तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि ऊर्जा उत्पादन और जैविक कृषि को बढ़ावा देने वाले केंद्र के रूप में विकसित होंगे। प्रदेश सरकार का मानना है कि तकनीक आधारित यह पहल पर्यावरण संरक्षण में मदद करने के साथ गांवों में रोजगार सृजन और किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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