न्यूज डेस्क, 9 मार्च 2026:
अमेरिकी-इजरायली हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के करीब एक सप्ताह बाद देश को नया लीडर मिल गया। ईरान की सर्वोच्च धार्मिक संस्था ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर घोषित कर दिया है। देर रात की गई इस घोषणा के साथ ही ईरान की सेना और राजनीतिक नेतृत्व ने उनके प्रति निष्ठा जताते हुए समर्थन दे दिया है।
मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब ईरान गंभीर उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। एक ओर अमेरिका और इजरायल के साथ जारी सैन्य संघर्ष तेज हो रहा है तो दूसरी ओर इस टकराव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। ऐसे माहौल में नए सुप्रीम लीडर का चयन ईरान की राजनीति और क्षेत्रीय समीकरणों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी नए नेता के प्रति पूरी निष्ठा जताई है। संगठन ने बयान जारी कर कहा कि वह नए सुप्रीम लीडर के आदेशों का पूरी तरह पालन करेगा और जरूरत पड़ने पर देश के लिए अपनी जान तक कुर्बान करने को तैयार है।
IRGC का यह समर्थन सत्ता परिवर्तन को स्थिर बनाए रखने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। ईरान की संसद के स्पीकर ने भी मोजतबा खामेनेई के चयन का स्वागत करते हुए कहा कि नए सुप्रीम लीडर का अनुसरण करना हर नागरिक का धार्मिक और राष्ट्रीय कर्तव्य है।
मोजतबा खामेनेई का जन्म 8 सितंबर 1969 को ईरान के उत्तर-पूर्वी शहर मशहद में हुआ था। यह शहर देश का प्रमुख धार्मिक केंद्र माना जाता है। वह अयातुल्ला अली खामेनेई के छह बच्चों में से एक हैं, जिन्होंने तीन दशक से अधिक समय तक ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में सत्ता संभाली।
मोजतबा ने पवित्र शहर कोम में इस्लामिक थियोलॉजी की पढ़ाई की जो शिया धार्मिक शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने वहां धार्मिक शिक्षा हासिल कर ‘हुज्जत अल-इस्लाम’ का दर्जा प्राप्त किया, जो आयतुल्ला से नीचे का मध्य स्तर का धार्मिक पद है। हालांकि मोजतबा लंबे समय तक पर्दे के पीछे रहने वाले प्रभावशाली व्यक्तियों में गिने जाते रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनकी मौजूदगी सीमित रही, लेकिन ईरानी सत्ता तंत्र में उनके प्रभाव को लेकर वर्षों से चर्चा होती रही है।
अमेरिका ने 2019 में मोजतबा खामेनेई पर प्रतिबंध भी लगाया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने पिता के शासनकाल में राजनीतिक मामलों में सक्रिय भूमिका निभाई और ईरानी सुरक्षा बलों के साथ मिलकर सरकार की नीतियों को आगे बढ़ाने में योगदान दिया।
56 वर्ष की उम्र में मोजतबा खामेनेई 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स द्वारा चुने गए दूसरे सुप्रीम लीडर बन गए हैं। उनका चयन ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में शीर्ष स्तर पर एक दुर्लभ पारिवारिक उत्तराधिकार के रूप में भी देखा जा रहा है जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है।






