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च्यवनप्राश के जनक च्यवन ऋषि की तपोभूमि का होगा कायाकल्प, 81 लाख से बदलेगी कन्नौज की तस्वीर

जिस धरती पर महर्षि च्यवन ने की थी कठोर तपस्या, अब वहीं जुटेंगी पर्यटन की आधुनिक सुविधाएं, मल्टीपर्पज हॉल से सोलर पैनल और स्ट्रीट लाइट तक का होगा इंतजाम

लखनऊ/कन्नौज, 6 सितंबर 2026:

यूपी की इत्र नगरी कन्नौज अपनी खुशबू के साथ ही आयुर्वेद और ऋषि परंपरा की ऐतिहासिक विरासत के लिए भी देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करेगी। प्रदेश सरकार ने ‘च्यवनप्राश’ के जनक माने जाने वाले महर्षि च्यवन की तपोभूमि च्यवन ऋषि आश्रम के पर्यटन विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पर्यटन विकास योजना के तहत छिबरामऊ क्षेत्र के गुगरापुर विकासखंड स्थित इस पौराणिक स्थल के कायाकल्प के लिए 81.35 लाख रुपये की परियोजना मंजूर की गई है। परियोजना की पहली किस्त के तौर पर 61 लाख रुपये जारी भी कर दिए गए हैं।

च्यवन ऋषि आश्रम को भारतीय ऋषि परंपरा, तपस्या और आयुर्वेदिक ज्ञान की महत्वपूर्ण धरोहर माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महर्षि च्यवन ने इसी तपोस्थली पर वर्षों तक कठोर साधना की थी। अब सरकार इस आध्यात्मिक और ऐतिहासिक स्थल को ऐसी सुविधाओं से लैस करने जा रही है, जिससे श्रद्धालुओं के साथ-साथ देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी बेहतर अनुभव मिल सके।

आश्रम के पास बनेगा मल्टीपर्पज हॉल

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पर्यटन विकास के तहत आश्रम के निकट बहुउद्देश्यीय हॉल का निर्माण कराया जाएगा। परिसर को रोशन करने के लिए स्ट्रीट लाइट, आगंतुकों के बैठने के लिए आरसीसी बेंच और रास्तों की जानकारी देने के लिए साइनेज लगाए जाएंगे। पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सोलर पैनल भी स्थापित किए जाएंगे। इन कार्यों को उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) के माध्यम से कराया जाएगा। विभाग का जोर पर्यटकों के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर रहेगा।

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च्यवनप्राश से जुड़ी है दिलचस्प पौराणिक कथा

मान्यता है कि महर्षि च्यवन जब यहां तपस्या में लीन थे, तब उनके चारों ओर दीमक का विशाल टीला बन गया था। इसी तपोभूमि से राजकुमारी सुकन्या की कथा भी जुड़ी है। कहा जाता है कि सुकन्या की सेवा और समर्पण तथा अश्विनी कुमारों के दिव्य आशीर्वाद से महर्षि च्यवन को पुनः यौवन और दृष्टि प्राप्त हुई। इसके बाद उन्होंने मानव स्वास्थ्य और आयुर्वेद के क्षेत्र में शोध किया। मान्यता है कि इसी ज्ञान परंपरा से च्यवनप्राश जैसे प्रसिद्ध आयुर्वेदिक योग का उद्भव हुआ।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि च्यवन ऋषि आश्रम भारतीय ऋषि परंपरा, तपस्या और आयुर्वेदिक ज्ञान की अमूल्य धरोहर है। इसके विकास से कन्नौज की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी और श्रद्धालुओं व पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी।

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कन्नौज में 21.73 लाख से ज्यादा पर्यटक पहुंचे

च्यवन ऋषि आश्रम के अलावा कन्नौज में लाख बहोसी पक्षी अभ्यारण्य, कन्नौज पुरातात्विक संग्रहालय, तिर्वा का माता अन्नपूर्णा मंदिर, मेहंदी घाट, स्वयंभू बाबा गौरी शंकर मंदिर और 52 खंभों वाली मकदूम जहानिया जैसे प्रमुख स्थल भी हैं। पर्यटन विभाग के मुताबिक वर्ष 2025 में 21.73 लाख से अधिक पर्यटक कन्नौज पहुंचे। अब च्यवन ऋषि आश्रम का विकास जिले के पर्यटन मानचित्र को और विस्तार देने की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

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Rakesh Kumar Verma

राकेश कुमार वर्मा एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें मीडिया जगत में लगभग 31 वर्षों का व्यापक और समृद्ध अनुभव है। इन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों ही माध्यमों में कार्य करते हुए अपनी मजबूत और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। यूपी की राजधानी लखनऊ में स्वतंत्र भारत, राष्ट्रीय सहारा, जनसत्ता एक्सप्रेस,… More »

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