
लखनऊ, 6 सितंबर 2026:
यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव का सियासी काउंटडाउन तेज होने लगा है। भाजपा ने चुनावी तैयारी को धार देने के लिए संगठन की कमान नए प्रभारी विनोद तावड़े के हाथों में सौंपने के बाद अब जमीनी स्तर पर रणनीति बनाने की कवायद तेज कर दी है। यूपी प्रभारी बनने के बाद पहली बार लखनऊ पहुंचे तावड़े रविवार को पार्टी कार्यालय में प्रदेश पदाधिकारियों के साथ मंथन किया। माना जा रहा है कि बैठक में वह चुनावी एजेंडे की दिशा तय करने के साथ ही संगठन के नेताओं से जमीनी फीडबैक और सुझाव लिया।
बैठक में प्रदेश के सह-प्रभारी जगदीश ईश्वरभाई पटेल भी मौजूद रहे। इसके बाद क्षेत्रीय प्रभारियों, क्षेत्रीय अध्यक्षों और क्षेत्रीय महामंत्रियों के साथ भी बैठक प्रस्तावित है। इसमें अलग-अलग क्षेत्रों की राजनीतिक स्थिति, संगठन की मजबूती और चुनावी रणनीति पर चर्चा होगी। यानी भाजपा अब केवल लखनऊ से चुनावी रणनीति बनाने के बजाय बूथ और क्षेत्र की राजनीतिक जमीन को पढ़ने की तैयारी में है।
योगी से मुलाकात, डिप्टी सीएम के दरवाजे तक पहुंचे तावड़े
रविवार सुबह तावड़े और सह-प्रभारी जगदीश ईश्वरभाई पटेल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कालिदास मार्ग स्थित सरकारी आवास पर शिष्टाचार भेंट की। इससे पहले शनिवार को तावड़े ने प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह के साथ चुनावी तैयारियों पर चर्चा की थी। शनिवार देर शाम उन्होंने दोनों उप मुख्यमंत्रियों केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक से भी उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक बातचीत में सरकार के कामकाज, जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ आगामी चुनाव और संगठन की रणनीति पर चर्चा हुई।

‘योगी की कप्तानी में फिर फतह करेंगे यूपी’
लखनऊ पहुंचते ही तावड़े ने 2027 के चुनाव को लेकर भाजपा का आत्मविश्वास भी जाहिर कर दिया। उन्होंने कहा कि योगी की अगुआई में भाजपा एक बार फिर 2027 में यूपी फतेह करेगी। इसके साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी के ‘PDA’ पर तंज कसते हुए इसका अर्थ ‘पराया धन अपना’ बताया। उन्होंने रुपये-पैसे, जमीन-जायदाद और स्त्रीधन का जिक्र किया। यही बयान अब भाजपा के संभावित चुनावी नैरेटिव का संकेत माना जा रहा है। खासकर महिला सुरक्षा को लेकर भाजपा, सपा शासनकाल को घेरने की तैयारी करती दिख रही है।
युवाओं के लिए क्यों अहम है तावड़े का मिशन?
यूपी का 2027 का चुनाव सत्ता की लड़ाई के साथ युवाओं के भविष्य, रोजगार, शिक्षा, सुरक्षा और अवसरों से जुड़े सवालों का भी चुनाव होगा। भाजपा संगठन में नई ऊर्जा भरकर युवाओं तक अपनी योजनाओं और उपलब्धियों का संदेश पहुंचाने की कोशिश करेगी। दूसरी ओर विपक्ष सरकार के सामने रोजगार, महंगाई और अन्य जमीनी सवाल खड़े कर सकता है।
मालूम हो कि 18 अगस्त को तावड़े को यूपी प्रभारी और जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी बनाया गया था। तावड़े भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद हैं। वे हरियाणा और बिहार के प्रभारी रह चुके हैं। 2025 में उनके प्रभार में भाजपा ने बिहार में बड़ी जीत दर्ज की थी। अब यूपी जैसी बड़ी राजनीतिक प्रयोगशाला में उनकी अग्निपरीक्षा है और 2027 का रण इसका सबसे बड़ा इम्तिहान होगा।






