लखनऊ, 29 मार्च 2026:
सीमित संसाधनों और कम आमदनी के बीच आजीविका के लिए संघर्ष करने वाली सोनभद्र की विनीता आज सफलता की मिसाल बन चुकी हैं। वे परिवार के साथ पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। यूपी सरकार की महिला सशक्तीकरण योजनाओं और सही मंच के सहयोग से विनीता ने महज दो वर्षों में 67 लाख रुपये की कमाई कर यह साबित कर दिया कि गांव की महिलाएं भी आर्थिक क्रांति की अगुआ बन सकती हैं।
स्नातक तक शिक्षित विनीता 14 सदस्यीय संयुक्त परिवार की जिम्मेदारियां संभाल रही थीं। पति अविनाश के साथ मिलकर वे 10-12 पशुओं के जरिए दुग्ध उत्पादन का कार्य करती थीं। निजी डेयरियों पर निर्भरता के कारण उन्हें न तो समय पर भुगतान मिल पाता था और न ही उचित मूल्य। लगातार मेहनत के बावजूद आय सीमित रहने से आर्थिक स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हो रहा था।
जीवन में बदलाव का असली मोड़ तब आया जब विनीता ने काशी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से जुड़ने का निर्णय लिया। इस कदम ने उनकी तकदीर बदल दी। कंपनी से जुड़ने के बाद उन्हें दूध का सही दाम, समय पर भुगतान और आधुनिक प्रशिक्षण की सुविधाएं मिलने लगीं। विनीता ने वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाते हुए अपने डेयरी व्यवसाय को विस्तार दिया।
अब विनीता के पास 40 से अधिक दुधारू पशु हैं और वे ‘लखपति दीदी’ के रूप में जानी जाती हैं। उनकी सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने मात्र दो वर्षों में 67 लाख रुपये की आय अर्जित की है।
काशी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी पूर्वांचल के सात जिलों में 46 हजार से अधिक महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ रही है। विनीता का कहना है कि इस प्लेटफॉर्म और स्वयं सहायता समूहों ने उन्हें सिर्फ आर्थिक मजबूती ही नहीं दी बल्कि आत्मविश्वास और जीवन जीने का नया नजरिया भी प्रदान किया है।
विनीता की सफलता की यह कहानी दर्शाती है कि यदि सही दिशा, प्रशिक्षण और सरकारी सहयोग मिले तो ग्रामीण महिलाएं अपने परिवार की तकदीर बदलने के साथ ही समाज में व्यापक बदलाव की अगुआ भी बन सकती हैं।






