
लखनऊ, 9 जुलाई 2026:
यूपी की लखनऊ की अलीगंज कॉलोनी के सेक्टर-डी स्थित में 22 जून को धधकने वाली अवैध बिल्डिंग की किस्मत का आज फैसला आ गया। एलडीए कोर्ट ने 15 मौतों की जिम्मेदार इस अवैध बिल्डिंग को जमींदोज किये जाने की मंजूरी दे दी गई। भवन के ध्वस्तीकरण संबंधी मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद एलडीए के विहित अधिकारी अतुल कुमार की कोर्ट ने ये निर्णय सुनाया है।

अलीगंज स्थित इस बिल्डिंग की आग इतनी भयावह थी कि अंदर फंसे छात्रों को ऊपर से छलांग लगानी पड़ी। कुछ हिम्मत जुटाकर केबिल के सहारे नीचे उतरे। सूचना पाकर सीएम योगी आदित्यनाथ खुद अलीगढ़ में चल रही जनसभा छोड़कर लखनऊ अलीगंज मौके पर पहुंचे थे। सीएम के तेवरों से अफसर भी सहमे थे। शुरुआती जांच में पता चला कि आवासीय मानचित्र स्वीकृत होने के बावजूद भवन का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था। इसी आधार पर एलडीए ने 23 जून को ही भवन मालिक को नोटिस जारी कर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की थी। जांच में सामने आया कि भवन में फायर सेफ्टी, सेटबैक समेत कई अनिवार्य मानकों का पालन नहीं किया गया था। फायर एग्जिट की जगह लिफ्ट लगी मिली। मृतकों में शामिल सभी 15 युवा थे। इन्हें बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला।

इस मामले की पहली सुनवाई मंगलवार को हुई थी लेकिन कोई निर्णय नहीं हो सका। बिल्डिंग मालिक के वकीलों ने नोटिस का जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा था। इसे कोर्ट ने अस्वीकार करते हुए केवल एक दिन की मोहलत दी। बुधवार को दोबारा सुनवाई के दौरान बिल्डिंग मालिक की ओर से नई भवन निर्माण उपविधि का हवाला देते हुए निर्माण को वैध घोषित करने या इस मुद्दे पर विस्तृत बहस कराने की मांग की गई। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि भवन का कोई हिस्सा अवैध है तो उसे भवनस्वामी को स्वयं हटाने की अनुमति दी जाए। वकीलों ने अन्य अदालत में सुनवाई का हवाला देकर दो दिन का समय भी मांगा लेकिन विहित प्राधिकारी ने स्पष्ट किया कि समय केवल एक दिन का ही मिलेगा। गुरुवार को इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। शुक्रवार को ध्वस्तीकरण का फैसला सुना दिया गया।

हालांकि कहा ये भी जा रहा है कि बिल्डिंग मालिक के पास अभी कमिश्नर कोर्ट और इसके आगे ऊपरी अदालतों में जाने का रास्ता खुला हुआ है, इसलिए अभी डिमोलिशन की कार्रवाई में थोड़ा और वक्त लग सकता है।






