लखनऊ, 6 जून 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के सुल्तानपुर रोड पर विकसित की जा रही एलडीए की बहुप्रतीक्षित आईटी सिटी और वेलनेस सिटी योजनाओं में जमीन खरीदकर मुनाफा कमाने की कोशिश करने वालों को बड़ा झटका लगा है। मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद शासन ने योजना क्षेत्र की जमीनों की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री पर रोक लगाने की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके साथ ही शनिवार से इन क्षेत्रों में जमीनों की किसी भी प्रकार की खरीद-फरोख्त अवैध मानी जाएगी।
एलडीए किसान पथ के किनारे करीब 1054 हेक्टेयर क्षेत्र में आईटी सिटी और लगभग 1198 एकड़ में वेलनेस सिटी विकसित कर रहा है। दोनों परियोजनाएं लैंड पूलिंग मॉडल पर आधारित हैं। इसके तहत किसानों की भूमि लेकर उन्हें विकसित भूखंड वापस दिए जाते हैं। सामान्य रूप से किसानों को उनकी दी गई जमीन के बदले 25 प्रतिशत विकसित भूमि लौटाई जाती है। 10 एकड़ से अधिक भूमि देने वाले किसानों को 50 प्रतिशत तक विकसित भूमि का लाभ मिल सकता है।

एलडीए अधिकारियों के अनुसार रजिस्ट्री पर रोक लगने के बावजूद लैंड पूलिंग की प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी। हालांकि अब केवल वही व्यक्ति इस योजना में भाग ले सकेगा जिसके नाम पर जमीन दर्ज है। नई खरीद के माध्यम से कोई व्यक्ति भूमि लेकर लैंड पूलिंग का लाभ नहीं उठा सकेगा। इससे बाहरी निवेशकों और बिचौलियों की सक्रियता पर प्रभावी रोक लगेगी।
एलडीए ने योजना क्षेत्र के सभी गाटा नंबरों का विवरण निबंधन विभाग को उपलब्ध करा दिया है। इसके बाद इन जमीनों की रजिस्ट्री एलडीए के अलावा किसी अन्य व्यक्ति या संस्था के पक्ष में नहीं की जा सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से जमीनों की खरीद-फरोख्त, सट्टेबाजी और कृत्रिम रूप से बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगेगा। इसके साथ ही योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक भू-स्वामियों तक पहुंचेगा।
आईटी सिटी योजना में शामिल किए गए गांव
आईटी सिटी योजना में बक्कास, सिकंदरपुर अमोलिया, सिद्धपुरा, परेहटा, रकीबाबाद, मोहारी खुर्द, मोहारी कला, खुजौली, भटवारा, सोनई, कंजेहरा और पहाड़नगर टिकरिया गांव शामिल हैं।
ये गांव वेलनेस सिटी योजना के दायरे में
वहीं वेलनेस सिटी योजना के दायरे में बक्कास, मलूकपुर ढकवा, चौरहिया, चौरासी, दुलारमऊ, नूरपुर बेहटा और मस्तेमऊ गांव आते हैं। शासन के इस फैसले को दोनों योजनाओं के पारदर्शी और व्यवस्थित विकास की दिशा में अहम कदम माना जा रहा






