लखनऊ, 6 जून 2026:
लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि और तीन छात्रों के निष्कासन के खिलाफ चल रहा आंदोलन अब व्यापक छात्र आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। शनिवार को आंदोलन के पांचवें दिन भी धरनास्थल पर छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को दोहराया। आंदोलन को विभिन्न छात्र संगठनों, महाविद्यालयों के छात्रों और पूर्व छात्र नेताओं का समर्थन मिल रहा है।
शनिवार को धरनास्थल पर पहुंचे लविवि छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ समाजवादी नेता रमेश श्रीवास्तव ने आंदोलनरत छात्रों से मुलाकात कर उनका समर्थन किया। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन पर निशाना साधते हुए कहा कि विभिन्न पाठ्यक्रमों की फीस में की गई अप्रत्याशित वृद्धि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के रास्ते बंद कर देगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि एलएलबी की फीस को एक झटके में 24 हजार रुपये से बढ़ाकर 47 हजार रुपये प्रति सेमेस्टर कर दिया गया है। उनके अनुसार इससे एक वर्ष की फीस लगभग एक लाख रुपये तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि यदि यही स्थिति रही तो प्रोफेशनल शिक्षा केवल आर्थिक रूप से संपन्न वर्ग तक सीमित होकर रह जाएगी और सामान्य परिवारों के प्रतिभाशाली छात्र इससे वंचित हो जाएंगे।

उन्होंने कहा कि फीस वृद्धि के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों पर कार्रवाई करना चिंताजनक है। उनके मुताबिक निष्कासित छात्रों के खिलाफ किसी प्रकार की हिंसक गतिविधि का कोई प्रमाण नहीं है। उपलब्ध वीडियो फुटेज इसकी पुष्टि करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों का निष्कासन आंदोलन को कमजोर करने और छात्र नेताओं को डराने के उद्देश्य से किया गया है।
रमेश श्रीवास्तव ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन शुरू होने के कई दिन बाद भी कुलपति ने छात्रों से संवाद करने की पहल नहीं की। उन्होंने कहा कि छात्र अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रख रहे हैं लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।
धरने के दौरान छात्रों ने निष्कासन नहीं, न्याय दो, फीस वृद्धि वापस लो और इंकलाब जिंदाबाद जैसे नारे लगाए। छात्रों का कहना है कि छात्र हितों के मुद्दे उठाने पर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। आंदोलन को अन्य महाविद्यालयों का भी समर्थन मिल रहा है। हाल के दिनों में जय नारायण पीजी कॉलेज (केकेसी), डीएवी कॉलेज, सिटी अकादमी और नेशनल पीजी कॉलेज के छात्र भी धरने में शामिल हुए।
केकेसी के छात्रों ने एलएलबी परीक्षा परिणाम में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन के रवैये पर सवाल खड़े किए। समर्थन का दायरा बढ़ने के साथ अब यह आंदोलन केवल तीन छात्रों के निष्कासन तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि उच्च शिक्षा की बढ़ती लागत और छात्र अधिकारों के सवाल पर केंद्रित एक बड़े मुद्दे के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है।






