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लखनऊ चिड़ियाघर के 104वें स्थापना दिवस पर हुआ खास जश्न, जानिए कितनी बार बदला गया इसका नाम

लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान ने अपने 104वें स्थापना दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें अधिकारियों, कर्मचारियों और वन्यजीव प्रेमियों को सम्मानित किया गया।

लखनऊ, 29 नवंबर 2025 :

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान (लखनऊ चिड़ियाघर) ने 29 नवंबर को अपना 104वां स्थापना दिवस मनाया। इस मौके पर चिड़ियाघर परिसर में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें कई वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी और वन्यजीव प्रेमी शामिल हुए। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित CEC के सदस्य व रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी सीपी गोयल थे। सुबह से ही पर्यटक बड़ी संख्या में चिड़ियाघर पहुंचे, जिससे उद्यान पूरे दिन उत्साह से भरा रहा।

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Lucknow Zoo Marks 104th Foundation Day with Special Celebration

लखनऊ चिड़ियाघर की निदेशक अदिति शर्मा के मुताबिक स्थापना दिवस सभी के लिए बेहद खास है, क्योंकि यह प्राणी उद्यान पिछले 100 सालों में काफी आगे बढ़ा है। समय के साथ यहां कई आधुनिक सुविधाएं जोड़ी गईं और चिड़ियाघर को सुरक्षित व बेहतर बनाने के लिए लगातार काम किया गया। बदलती तकनीक, नए एनक्लोजर और उन्नत देखभाल व्यवस्था की वजह से यह चिड़ियाघर देश के प्रमुख प्राणी उद्यानों में शामिल हो गया है।

कार्यक्रम के दौरान उन अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया गया जिन्होंने वर्षों से चिड़ियाघर के विकास और जानवरों की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा, उन लोगों को भी सम्मान पत्र दिया गया जिन्होंने वन्यजीवों को गोद लेकर संरक्षण अभियान में योगदान दिया है। यह पहल चिड़ियाघर में जीव-जंतुओं की बेहतर देखरेख में काफी मददगार साबित हो रही है।

लखनऊ चिड़ियाघर हर साल लाखों पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करता है। यहाँ आने वाले बच्चे, छात्र और बुज़ुर्ग न केवल जानवरों को करीब से देखते हैं, बल्कि उनकी जीवनशैली, आदतों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई जरूरी पहलुओं के बारे में भी सीखते हैं। इस कारण यह जगह मनोरंजन के साथ-साथ शिक्षा का भी बड़ा केंद्र बन चुकी है।

कैसा रहा लखनऊ चिड़ियाघर का ऐतिहासिक सफर?

इस प्राणी उद्यान की स्थापना 29 नवंबर 1921 को तत्कालीन राज्यपाल सर स्पेंसर हरकोर्ट बटलर ने प्रिंस ऑफ वेल्स के आगमन पर की थी। पहले इसका नाम ‘प्रिंस ऑफ वेल्स प्राणी उद्यान’ था, जिसे बाद में बदलकर ‘लखनऊ प्राणी उद्यान’ किया गया और 2015 में इसका नाम ‘नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान’ रखा गया। 29 हेक्टेयर में फैला यह बड़ा चिड़ियाघर संरक्षण, शिक्षा और अनुसंधान के लिहाज़ से आज भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हर साल लगभग 15 लाख पर्यटक यहाँ आते हैं, जिनमें 5 लाख बच्चे शामिल होते हैं।

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