न्यूज डेस्क, 29 मई 2026:
महज दो दिन बाद एक जून से देशभर में कई अहम नियम बदलने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और जेब पर पड़ सकता है। गैस सिलेंडर की कीमतों से लेकर एटीएम ट्रांजैक्शन, यूपीआई पेमेंट, फिक्स्ड डिपॉजिट और आधार अपडेट तक कई बदलाव लागू होने की संभावना है।
एक जून से लागू होने वाले ये बदलाव आम लोगों के खर्च, बचत, बैंकिंग और डिजिटल लेनदेन पर बड़ा असर डाल सकते हैं। सबसे ज्यादा प्रभाव रसोई बजट पर पड़ सकता है। हर महीने की पहली तारीख को तेल कंपनियां एलपीजी सिलेंडर के नए रेट जारी करती हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए इस बार घरेलू गैस सिलेंडर महंगा होने की आशंका जताई जा रही है।
आधार कार्ड में नाम, पता या अन्य जानकारी अपडेट कराने वालों के लिए भी महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। 14 जून के बाद ऑनलाइन अपडेट कराने पर 25 रुपये और आधार सेवा केंद्र पर जाकर अपडेट कराने पर 50 रुपये शुल्क देना पड़ सकता है। ऐसे में जिन लोगों को आधार में बदलाव कराना है, वे तय समय से पहले प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
बैंकिंग सेवाओं में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। एटीएम से कैश निकालने, बैलेंस चेक करने और मिनी स्टेटमेंट जैसी सुविधाओं पर अतिरिक्त शुल्क बढ़ाया जा सकता है। नए नियमों के मुताबिक अपने बैंक के एटीएम से महीने में सिर्फ 5 मुफ्त ट्रांजैक्शन और दूसरे बैंक के एटीएम से मेट्रो शहरों में 3 मुफ्त ट्रांजैक्शन की सीमा लागू रह सकती है। इसके बाद हर अतिरिक्त ट्रांजैक्शन पर अलग से चार्ज देना होगा।
डिजिटल पेमेंट को सुरक्षित बनाने के लिए एनपीसीआई नया फीचर लागू करने जा रही है। अब किसी को पैसे भेजने से पहले स्क्रीन पर लाभार्थी का रजिस्टर्ड नाम दिखाई देगा। इससे गलत खाते में पैसे ट्रांसफर होने की संभावना कम होगी और ऑनलाइन भुगतान अधिक सुरक्षित माना जा रहा है।
जून में कई सरकारी और निजी बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों में बदलाव कर सकते हैं। कुछ स्पेशल एफडी स्कीम्स बंद होने की भी संभावना जताई जा रही है। ऐसे में निवेशकों को नई ब्याज दरों और योजनाओं पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है।
आयकर विभाग हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी में है। पैन कार्ड से जुड़े नियमों को और सख्त किया जा सकता है ताकि फर्जी लेनदेन और टैक्स चोरी पर रोक लगाई जा सके। सरकार अब केवल अप्रूव्ड सोलर पैनल लगाने वालों को ही सब्सिडी का लाभ दे सकती है। इससे सोलर ऊर्जा योजनाओं में गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।






