लखनऊ, 10 सितंबर 2026:
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में गुरुवार को एक बार फिर बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला। जिस घटनाक्रम के बाद आकाश आनंद की पार्टी में वापसी की अटकलें तेज हुई थीं, उसी के बीच बसपा सुप्रीमो मायावती ने अप्रत्याशित फैसला लेते हुए अपने बड़े भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से भी पूरी तरह मुक्त कर दिया। यानी 3 सितंबर को राष्ट्रीय संयोजक के पद की जिम्मेदारियों से हटाए जाने के बाद अब आकाश आनंद का बसपा से भी औपचारिक रूप से पत्ता साफ हो गया है।
यह फैसला आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ के राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास लेने की घोषणा के तुरंत बाद सामने आया। माना जा रहा था कि अशोक सिद्धार्थ के सक्रिय राजनीति से हटने के बाद आकाश आनंद के लिए बसपा में वापसी का रास्ता साफ हो सकता है लेकिन मायावती ने इसके उलट एक और बड़ा फैसला कर दिया।
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी अपनी लंबी पोस्ट में अशोक सिद्धार्थ के संन्यास को ‘देर आए दुरुस्त आए’ बताते हुए इसे सही कदम तो कहा लेकिन साथ ही उनके फैसले पर कई गंभीर सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा कि यदि अशोक सिद्धार्थ ने यह फैसला काफी पहले कर लिया होता तो बसपा, बहुजन समाज और बहुजन मूवमेंट के साथ-साथ आकाश आनंद को भी लगातार विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता।
मायावती ने आरोप लगाया कि अशोक सिद्धार्थ की नीयत और निजी अभिलाषा को लेकर उनकी चिंताएं अभी खत्म नहीं हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें आकाश आनंद के उज्ज्वल भविष्य और बसपा के व्यापक हित की वास्तविक चिंता होती तो वे तुरंत राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा करते।
1. आज श्री अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा अति-देर से उठाया गया यह सही क़दम है।
2. वैसे लोगों का यही कहना है कि अगर यह फैसला वे काफी पहले ही ले लेते तो बी.एस.पी., बहुजन समाज व बहुजन मूवमेन्ट तथा उनके दामाद श्री आकाश आनन्द को भी लगातार विपरीत परिस्थितियों…— Mayawati (@Mayawati) September 10, 2026
आकाश के ‘रिपोस्ट’ ने भी बढ़ाई दूरी! मायावती ने अपने पोस्ट में आकाश आनंद के रवैये को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि आकाश ने अशोक सिद्धार्थ के संन्यास से संबंधित उनकी पोस्ट को रिपोस्ट तक नहीं किया, जबकि इससे पहले वह बसपा प्रमुख की पोस्ट को रिपोस्ट कर अपनी वफादारी जताने का प्रयास करते रहे हैं। मायावती ने इसे भी आकाश और अशोक सिद्धार्थ के बीच निजी-पारिवारिक लगाव के पार्टी हित पर हावी होने का संकेत बताया।
मायावती ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि आकाश आनंद को पार्टी और मूवमेंट के वास्तविक हित तथा अपने राजनीतिक करियर की तुलना में रिश्ते-नातों का मोह अधिक है तो उनका ‘डबल माइण्ड’ होकर बसपा और बहुजन मूवमेंट का भला करना मुश्किल है। इसी आधार पर उन्होंने कहा कि जिस तरह 3 सितंबर को आकाश को राष्ट्रीय संयोजक की सभी अहम जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया था, उसी तरह अब उन्हें पार्टी से भी पूरी तरह ‘फ्री’ कर दिया गया है।

मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से निजी और पारिवारिक स्वार्थ से ऊपर उठकर बसपा को मजबूत करने की अपील की। इसके साथ ही यूपी में फिर से पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने और ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के लक्ष्य के साथ चुनावी संघर्ष में जुटने का आह्वान किया। इस तरह अशोक सिद्धार्थ के संन्यास से आकाश आनंद की वापसी की उम्मीद जगी थी लेकिन मायावती के एक अप्रत्याशित फैसले ने उन अटकलों पर ही विराम लगा दिया। अब आकाश आनंद बसपा के भीतर वापसी की स्थिति में नहीं अपितु पार्टी से बाहर एक नई राजनीतिक राह तलाशने की स्थिति में हैं।






