
लखनऊ, 4 सितंबर 2026:
बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ के सरकारी दावे पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि देश में खासकर अति-महंगाई, अपार गरीबी, बेरोजगारी आदि की मार से पीड़ित आम जनता अचंभित है कि वह किस पर भरोसा करे और किस पर ना करे।
सरकार बताए जनता को क्या लाभ मिला
मायावती ने कहा कि अगर सरकार के विकास दर के दावे को प्रथम दृष्टया मान लिया जाए तो यह अच्छी बात होगी, लेकिन अगर यह जुगाड़ के आंकड़े हैं तो यह चिंता की बात जरूर है। इसीलिए जनता में उम्मीद जगाने के लिए सरकार को विश्वसनीय ढंग से यह बताना चाहिए कि इस उच्च विकास दर का क्या लाभ देश की करोड़ों गरीब मेहनतकश जनता को मिला है और आगे में इसका क्या लाभ होगा।
जमीनी हकीकत से जुड़े हों विकास के आंकड़े
उन्होंने कहा कि विकास के आंकड़े व दावे आमजनहित से जुड़े होने के कारण दोधारी तलवार की तरह हैं। इसीलिए उन्हें जमीनी हकीकत से भी ज्यादा आंका जाता है। विकास वही सही व उपयोगी है जो जनता को भाए यानी जनता के जीवन में समतामूलक परिवर्तन लाए और लोग खुश व खुशहाल बनें।
देश का विकास अच्छे दिन महसूस कराए
मायावती ने कहा कि जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े व दावे अपनी जगह हैं, लेकिन विकास की असल हकदार देश की करोड़ों मेहनतकश जनता को भी इसका लाभ मिलना और उसे इसका महसूस होना देश व जनहित में जरूरी है। वरना यहां के लगभग 140 करोड़ लोग ’धनवान सरकार की गरीब जनता’ होने का बोझ लगातार ढोती रहेगी। उन्होंने कहा कि देश का विकास तभी ’अच्छे दिन’ वाला होगा जब यहां की करोड़ों बहुजन मेहनतकश जनता गरीबी, बेरोजगारी व भ्रष्टाचार आदि से मुक्त आत्म-सम्मान का थोड़ा सुखी जीवन जीने योग्य बनेगी।
1. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर अर्थात जीडीपी ग्रोथ के सरकारी दावे को लेकर ज़बरदस्त बहस छिड़ी हुई है, और देश में ख़ासकर अति-महंगाई, अपार ग़रीबी, बेरोज़गारी आदि की मार से पीड़ित आमजनता अचंभित भी है कि वह किस पर भरोसा करे और किस पर ना…
— Mayawati (@Mayawati) September 4, 2026
यूपी में आउटसोर्स कर्मचारियों के फैसले पर भी सवाल
मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आउटसोर्स कर्मचारियों का दोगुना तक मानदेय बढ़ाने व 20 लाख लोगों को सुरक्षा कवर आदि यूपी आउटसोर्स सेवा निगम की स्थापना के माध्यम से देने के फैसले पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इससे कहीं बेहतर होता लोगों को सीधे तौर पर सरकारी नौकरी देना, ताकि यह व्यवस्था अफसरशाही की मनमानी, भ्रष्टाचार एवं शोषण आदि के जंजाल से मुक्त हो।






