
न्यूज डेस्क, 13 अगस्त 2026:
राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क हादसों में घायलों को समय पर इलाज दिलाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एंबुलेंस सेवाओं के नियम और कड़े कर दिए हैं। अब टोल प्लाजा से 10 किलोमीटर के दायरे में किसी दुर्घटना की सूचना मिलने पर एंबुलेंस को 10 मिनट के भीतर मौके पर पहुंचना होगा। तय समय से देरी होने पर संबंधित एजेंसी या ऑपरेटर पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
गोल्डन आवर के भीतर अस्पताल पहुंचाना होगा
नए नियमों के मुताबिक इमरजेंसी टिकट मिलने के बाद घायल को एक घंटे के भीतर, यानी गोल्डन आवर के अंदर, नजदीकी अस्पताल पहुंचाना जरूरी होगा। यदि इसमें भी तय समय का पालन नहीं किया गया तो प्रति घटना 10 हजार रुपये की पेनल्टी लगेगी। 10 किलोमीटर से अधिक दूरी वाले मामलों में समय सीमा दूरी के हिसाब से बढ़ाई जाएगी।
GPS से होगी हर एंबुलेंस की निगरानी
NHAI ने कहा है कि सभी एंबुलेंस की निगरानी GPS डेटा और IMS Care Dashboard के जरिए की जाएगी। हाईवे पर चलने वाली हर एंबुलेंस में AIS-140 मानक वाला GPS डिवाइस होना जरूरी होगा। यदि GPS नहीं मिला या डैशबोर्ड पर एंबुलेंस दिखाई नहीं दी तो 2,500 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना लगाया जाएगा।

दो मिनट में रवाना होना अनिवार्य, टिकट रिजेक्ट किया तो भी होगी कार्रवाई
इमरजेंसी टिकट स्वीकार होने के दो मिनट के भीतर एंबुलेंस को रवाना करना होगा। यदि इसमें देरी हुई तो हर अतिरिक्त मिनट या उसके हिस्से के लिए 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। अगर ऑन-रोड यूनिट किसी इमरजेंसी टिकट को अस्वीकार करती है तो प्रति घटना 10 हजार रुपये का जुर्माना देना होगा। वहीं निरीक्षण के दौरान एंबुलेंस में जरूरी मेडिकल उपकरण, दवाएं या पैरामेडिकल स्टाफ की कमी मिलने पर भी प्रति निरीक्षण 10 हजार रुपये की पेनल्टी लगेगी।
रोजाना करनी होगी मॉक ड्रिल
नई व्यवस्था के तहत हर एंबुलेंस को 24 घंटे में कम से कम पांच किलोमीटर का ड्राई रन या मॉक ड्रिल करना होगा, ताकि वाहन हमेशा तैयार स्थिति में रहे। हालांकि जिस दिन एंबुलेंस किसी वास्तविक दुर्घटना में सेवा दे चुकी होगी और उसकी कुल आवाजाही पांच किलोमीटर से ज्यादा हो जाएगी, उस दिन इस नियम से छूट मिलेगी।
क्यों लिया गया फैसला
NHAI के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट में एंबुलेंस के रिस्पॉन्स टाइम में देरी पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। इन्हीं टिप्पणियों के बाद हाईवे पर Emergency Medical Service को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए नए नियम लागू किए गए।






