लखनऊ, 14 मई 2026:
यूपी में स्वास्थ्य सेवाओं को पारदर्शी, तकनीक आधारित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जय) के तहत अस्पतालों और चिकित्सकों के डाटा की गहन जांच कर व्यापक सत्यापन एवं सैनेटाइजेशन अभियान चलाया गया। सरकार का उद्देश्य है कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों तक बिना किसी गड़बड़ी के गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना और योजना में किसी भी तरह के फर्जीवाड़े पर पूरी तरह लगाम लगाना है।
साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि आयुष्मान योजना का लाभ वास्तविक पात्रों तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचे। इसके तहत तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कई सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। हाल ही में चलाए गए विशेष अभियान में अस्पतालों और चिकित्सकों से जुड़े डाटा का बारीकी से परीक्षण किया गया। इसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
जांच में पाया गया कि 28 चिकित्सकों के नाम 15 से अधिक अस्पतालों से जुड़े हुए थे। 274 डॉक्टर सात से अधिक अस्पतालों में दर्ज पाए गए। मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित चिकित्सकों और अस्पतालों को नोटिस जारी किए गए तथा तीन दिवसीय सत्यापन प्रक्रिया चलाई गई। इस दौरान सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया।

समीक्षा में यह भी सामने आया कि कई डॉक्टर पहले संबंधित अस्पतालों में कार्यरत थे लेकिन समय पर डाटा अपडेट न होने से उनके नाम रिकॉर्ड में बने रहे। वहीं, कई विशेषज्ञ चिकित्सक वास्तव में अलग-अलग अस्पतालों में सेवाएं दे रहे हैं। इससे दूरदराज क्षेत्रों के मरीजों को भी विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा मिल पा रही है। इससे प्रदेश के ग्रामीण और जरूरतमंद इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
सरकार ने साफ किया है कि अभियान का उद्देश्य किसी डॉक्टर या अस्पताल को परेशान करना नहीं बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को मजबूत बनाना है। योगी सरकार की प्राथमिकता है कि सरकारी योजनाओं में डाटा विसंगति, फर्जी क्लेम और अनियमितताओं को पूरी तरह रोका जाए ताकि सरकारी संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।
इसके साथ ही आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (ईएचआर) प्रणाली को तेजी से लागू किया जाएगा। इससे मरीजों का पूरा इलाज रिकॉर्ड डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा, उपचार प्रक्रिया तेज होगी और अस्पताल बदलने पर बार-बार जांच कराने की जरूरत भी कम पड़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और सरकारी निगरानी दोनों को नई मजबूती देगी।






