
न्यूज डेस्क, 25 अगस्त 2026:
त्योहारों का मौसम नजदीक आते ही आम आदमी की थाली पर महंगाई का बड़ा संकट मंडराने लगा है। मिठास घोलने वाली चीनी के बाद अब सब्जियों का स्वाद बढ़ाने वाले प्याज ने आम जनता की आंखों में आंसू ला दिए हैं। बीते पखवाड़े तक जो प्याज 30 रुपये किलो तक बिक रहा था, वह लखनऊ के खुदरा बाजारों में 50 से 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। आलू व हरी सब्जियों और चावल के दाम भी बढ़े हैं। रसोई के इस बिगड़े बजट ने आम परिवार के दैनिक खर्चों का संतुलन पूरी तरह से गड़बड़ा दिया है।
थाली से गायब हो रही हैं दैनिक जरूरत की चीजें
महंगाई की यह मार केवल प्याज तक सीमित नहीं है। रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाले आलू और टमाटर के दाम भी तेजी से चढ़े हैं। पिछले हफ्ते 20 रुपये किलो मिलने वाला आलू अब 30 रुपये किलो पर बिक रहा है, जबकि टमाटर 30 रुपये से उछलकर 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इसके अलावा चीनी के दाम पहले ही 65 से 70 रुपये प्रति किलो के स्तर पर बने हुए हैं। त्योहारी सीजन से ठीक पहले अरहर दाल, चावल, तेल और लौकी, तरोई, बैंगन, भिंडी, पालक जैसी हरी सब्जियों के साथ-साथ हरी मिर्च और धनिया के भाव भी दोगुने के करीब पहुंच रहे हैं।
आपूर्ति में कमी और मौसम का ट्रिपल अटैक
बाजार विशेषज्ञों और सब्जी व्यापारियों के अनुसार इस अप्रत्याशित मूल्य वृद्धि के पीछे तीन मुख्य कारण हैं। पहली बड़ी वजह मौसम की मार बताई जा रही है। लगातार बारिश और नमी के कारण मंडियों में रखा सब्जियों का स्टॉक सड़ रहा है। नमी की वजह से प्याज में फफूंदी लग रही है, जिससे व्यापारी कम स्टॉक रख रहे हैं।

स्थानीय फसल का उत्पादन कम होना दूसरा बड़ा कारण है। उत्तर प्रदेश के प्रमुख प्याज उत्पादक जिलों जैसे फर्रुखाबाद, कन्नौज, मेरठ और एटा में खरीफ सीजन की बोआई सही समय पर नहीं हो सकी। स्थानीय उपज न होने के कारण यूपी को पूरी तरह नासिक की आपूर्ति पर निर्भर रहना पड़ रहा है। नासिक में उत्पादन प्रभावित होना तीसरा कारण है।महाराष्ट्र में खरीफ फसल के रकबे में 5 से 7 प्रतिशत की गिरावट आई है। इससे राष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।
प्याज को लेकर देशभर का यही हाल
यह समस्या केवल लखनऊ तक सीमित नहीं है। दिल्ली में प्याज 65 रुपये किलो तक बिक रहा है। चेन्नई व देश के कई हिस्सों में भी कीमतें 58 से 60 रुपये किलो के आसपास बनी हुई हैं।

आम लोगों की बढ़ी परेशानी
लखनऊ की सब्जी मंडियों में ग्राहक अब खरीदारी में सतर्कता बरत रहे हैं। नरही मंडी के व्यापारियों का कहना है कि लोग अब किलो के बजाय आधा किलो या कुछ ग्राम में ही प्याज खरीद रहे हैं। कई व्यापारी ग्राहकों को राहत देने के लिए 2-3 किलो प्याज की खरीदारी पर 50 रुपये किलो का भाव लगा रहे हैं लेकिन फिर भी आम आदमी की जेब पर बोझ कम नहीं हो रहा है।
राहत की उम्मीद : ‘कांदा एक्सप्रेस’ और बफर स्टॉक
बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने विशेष कदम उठाने का फैसला किया है। नासिक से दिल्ली, चेन्नई, कोच्चि और गुवाहाटी जैसे प्रमुख शहरों तक तेजी से प्याज पहुंचाने के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। इसके अलावा NAFED और NCCF जैसी सरकारी एजेंसियों के पास मौजूद लगभग 1.2 लाख टन के बफर स्टॉक को भी बाजार में उतारा जा रहा है। यदि यह सप्लाई चेन समय पर दुरुस्त होती है तो आने वाले दिनों में जनता को महंगाई से कुछ राहत मिल सकती है।






