
नई दिल्ली, 24 जुलाई 2026:
देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे Paper Leak मामलों पर केंद्र सरकार अब और सख्त कानून लाने की तैयारी में है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने Public Examinations Act 2024 में संशोधन के मसौदे को मंजूरी दे दी है। नए प्रावधान लागू होने के बाद पेपर लीक के दोषियों को अधिकतम 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। सरकार संसद के मानसून सत्र में 27 जुलाई तक यह संशोधन विधेयक पेश करेगी।
कैबिनेट की बैठक में मिली मंजूरी
शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई CCS, CCEA और केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठकों में इस संशोधन पर चर्चा हुई। बैठक के बाद विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी गई। सरकार का कहना है कि नए कानून से भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में होने वाली धांधली पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी।
Paper Leak Mafia पर सख्त कार्रवाई
प्रस्तावित संशोधन में पेपर लीक से जुड़े संगठित गिरोहों और इस पूरे नेटवर्क को चलाने वालों के खिलाफ कड़े कानूनी प्रावधान किए गए हैं। जांच एजेंसियों को ऐसे मामलों में ज्यादा प्रभावी कार्रवाई का अधिकार मिलेगा, ताकि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी करने वाले लोगों पर तेजी से शिकंजा कसा जा सके।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में तीन महीने में होगी सुनवाई
सरकार ने पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए Special Fast Track Court को कानूनी आधार देने का भी प्रस्ताव रखा है। योजना है कि ऐसे मामलों की जांच और सुनवाई तय समय सीमा में पूरी हो। प्रस्ताव के मुताबिक अदालतें करीब तीन महीने के भीतर फैसला सुना सकेंगी, जिससे छात्रों को लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
छात्रों के भविष्य को बताया था गंभीर मुद्दा
इस फैसले से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक की घटनाओं को लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला बताया था। उन्होंने कहा था कि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कानून और मजबूत व्यवस्था जरूरी है। इसी दिशा में सरकार अब मौजूदा कानून को और मजबूत करने जा रही है।






