न्यूज डेस्क, 11 जुलाई 2026:
यूपी में हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से सीएम योगी आदित्यनाथ रविवार को गोरखपुर से राज्यव्यापी ‘पौधरोपण महायज्ञ-2026’ का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री सुबह गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के निकट ताल रिंग रोड पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण करेंगे। इस दौरान वह जनसभा को संबोधित कर प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान करेंगे।
इस अवसर पर प्रदेश के वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना भी मुख्यमंत्री के साथ मौजूद रहेंगे। प्रदेश सरकार ने इस वर्ष पूरे उत्तर प्रदेश में 35 करोड़ पौधे लगाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में वन विभाग के समन्वय से इस महाअभियान की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
मुख्यमंत्री लिंक एक्सप्रेसवे के पास त्रिवेणी के रूप में नीम, पीपल और बरगद के पौधे लगाकर अभियान का शुभारंभ करेंगे। इसके बाद वह ताल रिंग रोड पर मौलश्री का पौधा भी रोपित करेंगे। धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण इन पौधों के माध्यम से लोगों को प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया जाएगा।
प्रदेशव्यापी लक्ष्य के तहत अकेले गोरखपुर जिले को 55 लाख 28 हजार 600 पौधे लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस महाअभियान को सफल बनाने के लिए 27 विभागों को जोड़ा गया है। इनमें वन विभाग को सबसे बड़ा लक्ष्य मिला है।
गोरखपुर के डीएफओ शुभम सिंह के अनुसार जिले की सभी नर्सरियों में पौधों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई है। पौधों के बेहतर विकास और उनकी जीवित रहने की दर बढ़ाने के लिए अग्रिम मृदा कार्य, गड्ढों की खुदाई, उपजाऊ मिट्टी की व्यवस्था, पौधरोपण स्थलों का विकास, पौधों की सुरक्षा तथा अन्य आवश्यक तैयारियां पहले ही पूरी कर ली गई हैं।
जिले में विभिन्न विभागों को भी बड़े स्तर पर पौधरोपण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वन विभाग को 19.37 लाख, ग्रामीण विकास विभाग को 18.61 लाख, कृषि विभाग को 5.76 लाख, उद्यान विभाग को 2.85 लाख, पर्यावरण विभाग को 2.38 लाख, पंचायती राज विभाग को 2.02 लाख तथा राजस्व विभाग को 1.43 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया है।
प्रदेश सरकार का मानना है कि जनभागीदारी के साथ चलाया जा रहा यह पौधरोपण महायज्ञ उत्तर प्रदेश के हरित क्षेत्र को बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण, जलवायु संतुलन और भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।






