कुशीनगर, 11 जुलाई 2026:
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कुशीनगर दौरे के दौरान विकास, कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक योजनाओं को लेकर अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग आज विकास को लेकर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें बताना चाहिए कि जब वे सत्ता में थे तब उन्होंने प्रदेश के लिए क्या किया। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में न साफ नीति थी और न ही विकास की नीयत, इसलिए प्रदेश लंबे समय तक पिछड़ा रहा।
मुख्यमंत्री ने रामकोला, हाटा और कुशीनगर तहसीलों के लिए करीब 525 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। कार्यक्रम में उन्होंने 110 वर्षीय रामविलास भगत और 104 वर्षीय रामप्रवेश साहनी का सम्मान किया, जबकि बच्चों का अन्नप्राशन भी कराया।

कुशीनगर को टूरिज्म और विकास का बड़ा केंद्र बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुशीनगर में टूरिज्म के क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं हैं और प्रदेश सरकार इन्हें आगे बढ़ाने का काम कर रही है। नई सड़कों का नेटवर्क तेजी से तैयार हो रहा है, जिससे जिले की तस्वीर बदल रही है। उन्होंने कहा कि आज कुशीनगर में मेडिकल कॉलेज, बेहतर सड़क संपर्क और इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। नए विमान उपलब्ध होते ही कुशीनगर एयरपोर्ट का संचालन और तेज होगा। सरकार इसे जेवर और अयोध्या एयरपोर्ट से भी जोड़ने की दिशा में काम कर रही है, जिससे पर्यटन और कारोबार दोनों को फायदा मिलेगा।
उन्होंने बताया कि जिले में महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का निर्माण तेजी से चल रहा है। इसके शुरू होने के बाद युवाओं को आधुनिक कृषि शिक्षा और नई तकनीक सीखने के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
विपक्ष पर हमला, बोले- पहले विकास ठप था
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जो लोग सरकार से सवाल पूछ रहे हैं, वे खुद सत्ता में रहते हुए प्रदेश को आगे नहीं बढ़ा सके। उन्होंने कहा कि पहले सरकारें पॉलिसी पैरालिसिस का शिकार थीं, इसलिए विकास योजनाएं कागजों से बाहर नहीं निकल पाती थीं। अब हर क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है और निवेश केवल नोएडा या गाजियाबाद तक सीमित नहीं है। गोरखपुर और कुशीनगर जैसे जिले भी बड़े निवेश के केंद्र बन रहे हैं। आज उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और पुलिस भर्ती जैसी प्रक्रियाओं में कुशीनगर के युवा भी अपनी मेहनत से चयनित होकर नियुक्ति पत्र प्राप्त कर रहे हैं। यह बदले हुए माहौल का परिणाम है।
कानून व्यवस्था पर पिछली सरकारों को घेरा
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले दुर्गा पूजा, जन्माष्टमी और होली जैसे त्योहारों के आयोजन में भी दिक्कतें खड़ी होती थीं। गरीबों की जमीन और नौकरियों पर दबंग कब्जा कर लेते थे। लेकिन अब डबल इंजन की सरकार गुंडागर्दी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करती। अगर कोई पर्व-त्योहारों के दौरान माहौल बिगाड़ने या उपद्रव करने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होती है। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश की पहचान कानून व्यवस्था और सुरक्षित माहौल से हो रही है।

मंदिरों के जीर्णोद्धार का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले प्रदेश में विकास की प्राथमिकताएं अलग थीं, लेकिन अब हर विधानसभा क्षेत्र में मंदिरों के जीर्णोद्धार का काम कराया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले मंदिरों के लिए मिलने वाले धन का इस्तेमाल कब्रिस्तानों की बाउंड्रीवाल बनाने में किया जाता था, जबकि अब धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण पर ध्यान दिया जा रहा है।
इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण को बताया बड़ी उपलब्धि
मुख्यमंत्री ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में कभी बड़ी चुनौती रहे जापानी इंसेफेलाइटिस का जिक्र करते हुए कहा कि पहले इसी मौसम में बड़ी संख्या में बच्चों की मौत होती थी। उस समय इलाज की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं थी। आज सरकार ने इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण किया है। उन्होंने कहा कि जब बच्चों के चेहरों पर मुस्कान दिखाई देती है तो लगता है कि सरकार की मेहनत सफल हुई है।
मुसहर समाज के उत्थान की गिनाईं योजनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षों तक गरीब और वंचित वर्ग के नाम पर राजनीति करने वालों ने मुसहर समाज को उसका अधिकार नहीं दिया। आज सरकार ने इस समाज के लोगों को भूमि का पट्टा, पक्का आवास, आयुष्मान भारत कार्ड, मुफ्त राशन, मुफ्त गैस कनेक्शन और मुफ्त बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराए हैं। अब वे आत्मविश्वास के साथ खुद को स्वतंत्र भारत का सम्मानित नागरिक मानते हैं।
उन्होंने कहा कि पहले मुसहर समाज के लोग भूख और बीमारी से जूझते थे, जबकि आज सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे उनके घर तक पहुंच रहा है।

शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाया है। इसके साथ ही बेसिक शिक्षा परिषद, माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और अन्य कर्मचारियों को सालाना पांच लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई गई है, ताकि इलाज के लिए किसी को आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।






