लखनऊ, 7 अप्रैल 2026:
यूपी की राजनीति में इन दिनों फिल्म ‘धुरंधर-2’ को लेकर जबरदस्त घमासान छिड़ा हुआ है। फिल्म में पूर्व माफिया अतीक अहमद से मिलते-जुलते किरदार को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और आतंकी नेटवर्क से जोड़कर दिखाए जाने पर विपक्ष खासकर सपा ने इसे भाजपा का प्रोपेगेंडा करार दिया है। विवाद अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा बल्कि सड़कों पर भी उतर आया है।
राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के कई जिलों में सपा प्रमुख अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाए गए हैं। इन होर्डिंग्स में अखिलेश यादव को फिल्म ‘धुरंधर’ के खलनायक के अंदाज में दिखाया गया है। तस्वीर के नीचे ‘अखिलेश का ल्यारी राज’ लिखा गया है, जो सीधे तौर पर अपराध और अराजकता से जोड़ने की कोशिश करता है।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि को ‘धुरंधर सीएम’ के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उनके साथ कन्या पूजन की तस्वीर लगाकर संदेश देने की कोशिश की गई है कि मौजूदा सरकार कानून-व्यवस्था और सांस्कृतिक मूल्यों को प्राथमिकता देती है। होर्डिंग्स में एक सवाल भी उछाला गया है…आपको क्या चाहिए?
इन पोस्टरों में सपा शासनकाल (2012-2017) के दौरान मुजफ्फरनगर, मेरठ और शामली में हुए दंगों की खबरों की कटिंग लगाई गई है। दूसरी तरफ योगी सरकार के दौरान माफिया अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी के खिलाफ हुई कार्रवाईयों को प्रमुखता से दिखाया गया है। इस तरह सपा सरकार को ‘दंगे और माफियाराज’ तथा वर्तमान सरकार को ‘सख्त कानून व्यवस्था’ के प्रतीक के रूप में पेश किया गया है।
ये होर्डिंग्स ‘यूथ अगेंस्ट माफिया’ नाम की संस्था द्वारा लगाए गए हैं जिसमें संगठन के पदाधिकारियों आशुतोष सिंह और अभिनव तिवारी के नाम और तस्वीरें भी शामिल हैं। संस्था खुद को एक नागरिक संगठन बताती है। वह युवाओं को जागरूक करने और अपराध के खिलाफ माहौल बनाने का दावा करती है।
फिलहाल इस पूरे विवाद पर किसी भी बड़े राजनीतिक दल की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है लेकिन जिस तरह फिल्म से शुरू हुआ विवाद अब सियासी पोस्टर वॉर में बदल गया है। इसने यूपी की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।






