Raebareli City

राहुल गांधी को मिली दादा फिरोज गांधी की वर्षों पुरानी अमानत… मंच पर हुए भावुक, मां सोनिया को भेजी तस्वीर

रायबरेली दौरे के दौरान राहुल गांधी उस समय भावुक हो गए, जब एक परिवार ने उन्हें उनके दादा फिरोज गांधी का वर्षों से सहेजा गया ड्राइविंग लाइसेंस सौंपा। इस दुर्लभ धरोहर ने क्रिकेट टूर्नामेंट के मंच को कुछ पल के लिए भावनात्मक बना दिया

विजय पटेल

रायबरेली, 21 जनवरी 2026:

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी मंगलवार को अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली दौरे पर थे, वहां वह उस वक्त भावुक हो गए, जब एक परिवार ने उन्हें उनके दादा फिरोज गांधी का ऐतिहासिक ड्राइविंग लाइसेंस सौंपा। वर्षों से सहेज कर रखी गई इस दुर्लभ धरोहर को हाथ में लेते ही राहुल गांधी की आंखें नम हो गईं और माहौल कुछ पल के लिए भावनात्मक हो गया।

क्रिकेट मंच बना भावुक क्षण का गवाह

दरअसल, राहुल गांधी भुएमऊ गेस्ट हाउस से आईटीआई के पास स्थित राजीव गांधी स्टेडियम पहुंचे थे, जहां रायबरेली प्रीमियर लीग क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसी कार्यक्रम के दौरान टूर्नामेंट की एक टीम के मालिक विकास सिंह मंच पर पहुंचे और राहुल गांधी को एक छोटी सी किताब सौंपी, जिसमें फिरोज गांधी का ड्राइविंग लाइसेंस सुरक्षित रखा गया था।

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लाइसेंस हाथ में लेते ही छलक पड़ी भावनाएं

मंच पर जैसे ही राहुल गांधी ने लाइसेंस हाथ में लिया, वे कुछ देर तक उसे उलट-पलट कर देखते रहे और भावुक नजर आए। इसके बाद उन्होंने तुरंत लाइसेंस की तस्वीर ली और अपनी मां सोनिया गांधी को व्हाट्सएप के जरिये भेजी। इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि मंच पर मौजूद अमेठी सांसद किशोरी लाल शर्मा ने भी की।

एक परिवार की वर्षों पुरानी इच्छा हुई पूरी

विकास सिंह ने फोन पर बताया कि यह लाइसेंस उन्हें उनके ससुर ने सौंपा था। उनके ससुर की इच्छा थी कि यह ऐतिहासिक धरोहर किसी तरह गांधी परिवार तक पहुंचे। यह लाइसेंस फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज के निर्माण के दौरान मिला था और तभी से उनके परिवार में सुरक्षित रखा गया था। वर्षों बाद यह धरोहर राहुल गांधी तक पहुंची और कार्यक्रम एक भावनात्मक पल में बदल गया।

फिरोज गांधी की जीवन यात्रा और रायबरेली का रिश्ता

12 सितंबर 1912 को बॉम्बे में एक पारसी परिवार में जन्मे फिरोज गांधी का बचपन का नाम फिरोज जहांगीर घांडी था। उनके पिता एक प्रसिद्ध वकील थे। पिता के निधन के बाद उनकी मां उन्हें लेकर इलाहाबाद आ गईं, जहां स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े बड़े नेताओं के संपर्क में आकर फिरोज गांधी एक सक्रिय जननेता बने। उन्होंने 1952 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में रायबरेली से जीत दर्ज की थी। सात सितंबर 1960 को उनका निधन हो गया था।

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