Lucknow CityUttar Pradesh

RSS प्रमुख भागवत के आगमन पर लखनऊ यूनिवर्सिटी में हंगामा, छात्रों का विरोध, कई हिरासत में

छात्र-छात्राओं ने मोहन भागवत के विरोध में नारे लगाए, रोकने की कोशिश के दौरान पुलिस से प्रदर्शनकारी छात्रों की नोकझोंक व खींचतान, हिरासत में लेकर भेजे गए इको गार्डन

लखनऊ, 18 फरवरी 2026:

लखनऊ विश्वविद्यालय में बुधवार सुबह उस वक्त माहौल गरमा गया जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत एक संगोष्ठी में शामिल होने पहुंचे। उनके पहुंचते ही एनएसयूआई, समाजवादी छात्रसभा और भीम आर्मी से जुड़े छात्र-छात्राओं ने मोहन भागवत वापस जाओ के नारे लगाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते हालात तनावपूर्ण हो गए और विश्वविद्यालय परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो गया।

प्रदर्शनकारी छात्रों को रोकने की कोशिश में पुलिस से उनकी नोकझोंक व खींचतान शुरू हो गई। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने कार्रवाई तेज की और प्रदर्शन कर रहे कई छात्रों को उठाकर जीप व बसों में भर दिया। कुछ छात्र जमीन पर लेट गए तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें टांगकर वाहनों में डाला। हिरासत में लिए गए सभी छात्रों को इको गार्डन भेजा गया। इसके बाद कड़ी सुरक्षा के बीच मोहन भागवत का कार्यक्रम शुरू हुआ।

एनएसयूआई से जुड़े शुभम ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन संघ से जुड़े संगठनों को कार्यक्रम की अनुमति देता है जबकि विपक्षी छात्र संगठनों को हॉल तक नहीं मिलते। उन्होंने कहा कि यूजीसी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे दिया है। इसके बावजूद आरएसएस प्रमुख की ओर से इस पर कोई स्पष्ट बयान नहीं आया। छात्रों का कहना था कि कैंपस में अभिव्यक्ति की आजादी सबके लिए समान होनी चाहिए।

Ruckus at Lucknow University Protests Erupt Today (1)

वैसे, प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए पुलिस पहले से अलर्ट मोड में थी। सुबह करीब 5 बजे समाजवादी छात्रसभा के सदस्य तौकील के हॉस्टल पर पुलिस पहुंच गई और उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया गया। समाजवादी छात्रसभा के कई अन्य सदस्यों को भी हिरासत में लेकर हसनगंज थाना ले जाया गया। इससे छात्र संगठनों में आक्रोश और बढ़ गया।

मोहन भागवत दो दिवसीय लखनऊ प्रवास पर हैं। इससे एक दिन पहले वह निरालानगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में शामिल हुए थे। वहां विभिन्न वर्गों के लोगों के सवालों के जवाब देते हुए उन्होंने यूजीसी गाइडलाइंस पर कहा था कि कानून सभी को मानना चाहिए। यदि कानून गलत लगता है तो उसे बदलने के संवैधानिक उपाय मौजूद हैं लेकिन कानून को जातियों के बीच झगड़े का कारण नहीं बनाना चाहिए।

हंगामे के बाद विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। छात्र संगठनों ने प्रशासन से निष्पक्षता और सभी संगठनों को समान अवसर देने की मांग की है वहीं पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई जरूरी थी।

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