लखनऊ, 22 फरवरी 2026:
यूपी में महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण आजीविका अभियानों का असर अब जमीन पर साफ दिखने लगा है। बरेली जनपद के ब्लॉक बिथरी चैनपुर की ग्राम पंचायत उडला जागीर की रहने वाली सलमा इसकी जीवंत मिसाल हैं। कभी जिनके घर में सीमित आय और बेरोजगारी की चिंता रोज का सच थी लेकिन आज वही सलमा गांव की आर्थिक गतिविधियों की धुरी बन चुकी हैं।
बीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद सलमा के सामने सबसे बड़ी चुनौती रोजगार की थी। पिता ऑटो चलाकर परिवार का गुजारा करते थे। आय कम और जिम्मेदारियां ज्यादा थीं। नौकरी न मिलने से सलमा निराश रहने लगीं। इसी दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ी उनकी मां को ब्लॉक स्तर पर बीसी सखी बनने की जानकारी मिली। ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने की इस पहल को योगी सरकार ने आगे बढ़ाया था। सलमा ने इस अवसर को पहचाना और 14 सितंबर 2021 को आवेदन कर प्रशिक्षण लिया। परीक्षा पास की और बीसी सखी के रूप में चयनित हो गईं।
कार्य शुरू करने के लिए उन्हें 75,000 रुपये का सपोर्ट फंड मिला। इसके बाद आरसेटी से प्रशिक्षण लेकर सलमा ने अपने ही गांव में बीसी सखी सेंटर स्थापित किया। आज वह प्रतिमाह करीब 35 हजार रुपये तक का कमीशन अर्जित कर रही हैं। गांव के लोग अब पैसे जमा करने-निकालने, खाते से जुड़ी सेवाओं और डिजिटल लेनदेन के लिए सीधे उनके सेंटर पर पहुंचते हैं। लंबी कतारों और दूर के बैंक जाने की मजबूरी खत्म हो गई है।
सलमा डिजिटल भुगतान, आधार आधारित सेवाओं, पेंशन और बीमा योजनाओं को लेकर जागरूकता शिविर भी लगाती हैं।
वह अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में पंजीकरण कराती हैं। सुबह आठ से शाम छह बजे तक उनकी सेवा से गांव में बचत और सामाजिक सुरक्षा के प्रति भरोसा बढ़ा है। सलमा कहती हैं कि अब पहचान बदली है। वे बेरोजगार युवती नहीं सशक्त बैंक सखी हैं। उनकी कहानी बताती है कि सही नीति, सही मार्गदर्शन और मजबूत इरादा मिल जाए, तो गांव की बेटी भी विकास की नई इबारत लिख सकती है।






