Uttar Pradesh

यूपी : आजीविका मिशन से बदली गांवों की तस्वीर… एक करोड़ से ज्यादा महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर

स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर बढ़ी आमदनी, लखपति दीदी और बीसी सखी जैसी योजनाओं ने खोले रोजगार के रास्ते

लखनऊ, 22 फरवरी 2026:

उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में चल रहा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन तेजी से असर दिखा रहा है। मिशन से जुड़कर प्रदेश की एक करोड़ से ज्यादा महिलाएं अब अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं और छोटे कारोबार से लेकर बैंकिंग सेवाओं तक अहम जिम्मेदारियां संभाल रही हैं। गांव स्तर तक योजनाओं की पहुंच बढ़ने से महिलाओं की आमदनी में भी लगातार इजाफा हुआ है।

स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाएं अब उद्यमिता की ओर बढ़ रही हैं। प्रदेश में करीब एक करोड़ पांच लाख महिलाएं समूहों से जुड़कर अलग अलग तरह के व्यवसाय चला रही हैं। इसी के साथ लखपति दीदी अभियान को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसका मकसद महिलाओं को स्थायी आय से जोड़ना है।

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प्रदेश में अब तक करीब साढ़े 18 लाख लखपति दीदी पंजीकृत हो चुकी हैं। महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और बाजार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसका असर यह है कि गांव गांव में महिलाएं खुद का काम संभालते हुए सफलता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।

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ग्रामीण बैंकिंग सेवाओं को घर तक पहुंचाने में बीसी सखी मॉडल अहम साबित हुआ है। एक ग्राम पंचायत एक बीसी सखी योजना के तहत 57 हजार ग्राम पंचायतों में तैनाती का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 50 हजार से ज्यादा बीसी सखियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। करीब 40 हजार महिलाओं ने मिलकर लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का लेनदेन किया है, जिससे गांवों में बैंकिंग सेवाएं आसान हुई हैं।

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मिशन के तहत महिलाओं को कृषि, डिजिटल बैंकिंग, ऊर्जा, स्वास्थ्य और स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। इससे परिवारों की आय बढ़ने के साथ गांवों में आर्थिक गतिविधियां भी तेज हुई हैं। बुजुर्गों और महिलाओं को अब बैंक जाने की जरूरत कम पड़ रही है, क्योंकि गांव में ही जमा निकासी, पेंशन और डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाएं मिल रही हैं।

छोटे कारोबार शुरू करने के लिए महिलाओं को आसान और चरणबद्ध पूंजी भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे खुद का रोजगार शुरू कर सकें और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत बना सकें। मिशन के तहत ड्रोन दीदी, बीसी सखी, सूर्य सखी, विद्युत सखी, कृषि आजीविका सखी, स्वास्थ्य सखी, सूक्ष्म उद्यम सखी, पशु सखी और बीमा सखी जैसी भूमिकाओं में महिलाएं सक्रिय होकर गांवों की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दे रही हैं।

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