
लखनऊ, 14 जुलाई 2026:
संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI) के 30वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने डॉक्टरों, शिक्षकों और मेडिकल छात्रों को सिर्फ डिग्री तक सीमित न रहने, बल्कि समाज की बड़ी जिम्मेदारियां निभाने का संदेश दिया। उन्होंने खास तौर पर 13 साल की बच्चियों की सेहत, समय पर जांच और सही मार्गदर्शन की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि इस उम्र में बेटियों पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है। इसी दौरान उन्होंने मेडिकल रिसर्च, मरीजों की बेहतर सुविधा, हॉस्टल व्यवस्था और संस्थान की गुणवत्ता को लेकर भी कई सुझाव दिए।
मंगलवार को हुए इस समारोह में तमाम छात्र व छात्राओं को डिग्रियां दी गईं, जबकि उत्कृष्ट शिक्षक, शोधकर्ता, डॉक्टर और विद्यार्थियों को विभिन्न पुरस्कार और गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का कार्यक्रम तय था, लेकिन वह शामिल नहीं हो सके।
13 साल की बेटियों पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत
राज्यपाल ने कहा कि 13 साल की उम्र ऐसी होती है जब लड़कियों में शारीरिक बदलाव शुरू होते हैं। इसी समय नियमित स्वास्थ्य जांच, सही इलाज और परिवार का सहयोग बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि कई जिलों में बच्चियों से मिलने के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि इस उम्र में जागरूकता की कमी बड़ी समस्या बन जाती है। किशोरावस्था में आकर्षण होना स्वाभाविक है। ऐसे समय में माता-पिता और शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। अगर दो युवा एक-दूसरे को पसंद करते हैं तो उन्हें पहले अपनी पढ़ाई पूरी करने और उसके बाद ही विवाह का फैसला लेने की सलाह दी जानी चाहिए।

मेरा उद्देश्य आलोचना नहीं, संस्थानों को बेहतर बनाना
राज्यपाल ने कहा कि उनके कई बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो जाते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य किसी की आलोचना करना नहीं होता। उन्होंने कहा कि जहां भी कमी दिखाई देती है, उसे सामने रखना उनकी जिम्मेदारी है ताकि संस्थान और बेहतर बन सकें। ज्यादा अंक हासिल करना ही किसी छात्र की पूरी पहचान नहीं हो सकता। शिक्षा में व्यवहार, रिसर्च, नवाचार और सामाजिक जिम्मेदारी जैसी दूसरी खूबियों को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
Research, Patent और किताबों पर भी उठाए सवाल
राज्यपाल ने संस्थान के निदेशक से पूछा कि रिसर्च प्रोजेक्ट, पेटेंट और मेडिकल किताबों की संख्या क्यों सीमित है। उन्होंने कहा कि विश्वस्तरीय संस्थान बनने के लिए रिसर्च और Innovation पर लगातार काम करना होगा। उन्होंने ICMR को भेजे गए रिसर्च प्रोजेक्ट्स की प्रोग्रेस की समीक्षा करने की भी बात कही। उनका कहना था कि मेडिकल संस्थानों को केवल इलाज तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि नई खोजों और रिसर्च में भी देश का नेतृत्व करना चाहिए।
SGPGI को देश का नंबर-1 संस्थान बनाने का लक्ष्य
राज्यपाल ने कहा कि SGPGI पहले ही देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शामिल है, लेकिन उनका लक्ष्य है कि अगले एक वर्ष के भीतर यह देश का नंबर-1 मेडिकल संस्थान बने। उन्होंने सरकार से मिलने वाले बजट का पारदर्शी और प्रभावी उपयोग करने पर भी जोर दिया। उन्होंने HPV वैक्सीन के व्यापक प्रचार की जरूरत बताते हुए कहा कि जागरूकता की कमी के कारण वर्षों तक हजारों महिलाओं की जान गई। समय पर टीकाकरण से सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाव संभव है।

छात्रों की सुविधाओं पर भी दिया जोर
राज्यपाल ने हॉस्टलों की व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि सभी हॉस्टलों में मेस की सुविधा होनी चाहिए। वाशिंग मशीन, कपड़े धोने की व्यवस्था, बेहतर वाई-फाई व आधुनिक कंप्यूटर जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि क्लासरूम की छोटी-छोटी कमियों को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि बेहतर माहौल से ही बेहतर शिक्षा मिलती है।
मरीजों की सफलता के आंकड़े भी सार्वजनिक हों
राज्यपाल ने संस्थान के निदेशक से कहा कि यदि हार्ट सर्जरी जैसी बड़ी संख्या में ऑपरेशन किए जा रहे हैं तो उनकी सफलता दर भी सामने आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मरीजों और समाज को यह जानने का अधिकार है कि इलाज के परिणाम कितने प्रभावी रहे। उन्होंने यह भी कहा कि कई सक्षम लोग मुफ्त इलाज कराकर चले जाते हैं, जबकि ऐसे लोगों को संस्थान की मदद के लिए आगे आना चाहिए।
निदेशक ने रखा अगले पांच साल का विजन
SGPGI के निदेशक प्रो. आरके धीमन ने संस्थान का भविष्य का रोडमैप प्रस्तुत करते हुए कहा कि SGPGIMS 2.0 के तहत रिसर्च, एडवांस मेडिकल एजुकेशन और World Class Healthcare पर सबसे ज्यादा फोकस किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि संस्थान में बच्चों के लिए 573 बेड वाला आधुनिक सेंटर तैयार किया जा रहा है। सलोनी हार्ट फाउंडेशन के सहयोग से एक साल में 300 हार्ट सर्जरी पूरी की जा चुकी हैं। आने वाले समय में इस सुविधा का और विस्तार किया जाएगा।

279 विद्यार्थियों को मिली डिग्री, कई हुए सम्मानित
दीक्षांत समारोह में कुल 279 विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें पीएचडी, डीएम, एमसीएच, एमडी, एमएस, एमएससी, बीएससी नर्सिंग, टेक्निकल कोर्स और मास्टर ऑफ हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन के विद्यार्थी शामिल रहे। इस दौरान दो मेडिकल पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। साथ ही कई डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को उत्कृष्ट रिसर्च, पेटेंट और अकादमिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।






