
बिजनेस डेस्क, 8 जुलाई 2026:
बुधवार सुबह भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत तेज गिरावट के साथ हुई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का असर घरेलू बाजार पर साफ दिखाई दिया। कारोबार शुरू होते ही निवेशकों ने बिकवाली शुरू कर दी, जिससे Sensex 550 अंक से ज्यादा टूट गया जबकि Nifty 24,250 के अहम स्तर से नीचे आ गया। Oil Price में उछाल की वजह से खास तौर पर ऑयल मार्केटिंग और एविएशन सेक्टर के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला।
बाजार में आई इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है। निवेशकों को आशंका है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर घरेलू अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार दोनों पर पड़ता है।
सुबह करीब 9:32 बजे तक के कारोबार में Sensex 549.79 अंक यानी करीब 0.70 फीसदी गिरकर 77,630.93 पर पहुंच गया। वहीं Nifty 173.71 अंक यानी 0.71 फीसदी टूटकर 24,225 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। कारोबार की शुरुआत से ही बाजार में चौतरफा दबाव बना रहा।
विदेशी बाजारों के साथ रुपये पर भी इसका असर दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 21 पैसे कमजोर होकर 95.17 पर पहुंच गया। तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ने की संभावना रहती है, जिसका असर रुपये पर भी पड़ता है।
Oil Price में तेजी का सबसे ज्यादा असर उन कंपनियों पर दिखा जिनकी लागत सीधे ईंधन पर निर्भर करती है। भारत पेट्रोलियम यानी BPCL के शेयर करीब चार फीसदी तक टूट गए। वहीं इंटरग्लोब एविएशन यानी IndiGo के शेयरों में करीब दो फीसदी की कमजोरी दर्ज की गई। निवेशकों को आशंका है कि एविएशन टरबाइन फ्यूल महंगा होने से एयरलाइन कंपनियों की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर उनके मुनाफे पर पड़ सकता है।
वैश्विक बाजारों का रुख भी मिला-जुला रहा। जापान का Topix Index करीब 0.5 फीसदी नीचे रहा जबकि ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 Index में करीब 1.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर हांगकांग का Hang Seng Index करीब 1.5 फीसदी मजबूत रहा। चीन का Shanghai Composite लगभग सपाट कारोबार करता दिखा। अमेरिकी S&P 500 Futures और यूरोपीय Euro Stoxx 50 Futures में भी ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल निवेशकों की नजर सिर्फ पश्चिम एशिया के हालात पर नहीं बल्कि कई दूसरे बड़े फैक्टर्स पर भी रहेगी। जून तिमाही के Corporate Results, भारत-अमेरिका के बीच संभावित Trade Deal और देश में मानसून की रफ्तार आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशक हर वैश्विक घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं। खास तौर पर Crude Oil की कीमतों में आगे क्या रुख रहता है, इसका असर आने वाले कारोबारी सत्रों में भी भारतीय शेयर बाजार पर दिखाई दे सकता है।






