लखनऊ/सारनाथ, 27 अप्रैल 2026:
बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर सारनाथ एक बार फिर आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक वैभव का केंद्र बनने जा रहा है। एक मई को सारनाथ में दो भव्य कार्यक्रमों का आयोजन होगा। इनमें धर्म, ज्ञान और विश्व शांति का संदेश उभरकर सामने आएगा।
अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया और इंडो-श्रीलंका इंटरनेशनल बुद्धिस्ट एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में सुबह मूलगंध कुटी विहार में ‘बौद्ध महोत्सव’ आयोजित किया जाएगा।
इस आयोजन में धम्म देशना, विपश्यना साधना, परिचर्चा और भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन जैसे आध्यात्मिक कार्यक्रम शामिल होंगे। इसके साथ ही विश्व शांति के प्रतीक-भगवान बुद्ध विषय पर निबंध और चित्रकला प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। इसमें युवाओं की भागीदारी विशेष आकर्षण होगी।
इसी दिन शाम को केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के शान्तरक्षित लॉन में बुद्ध पूर्णिमा महोत्सव संगोष्ठी का आयोजन होगा। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. वडछुग दोर्जे नेगी करेंगे। मुख्य अतिथि के रूप में हरगोविन्द बौद्ध मौजूद रहेंगे। संगोष्ठी में विभिन्न विद्वान वक्ता भगवान बुद्ध के विचारों और उनके वैश्विक महत्व पर प्रकाश डालेंगे।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि बुद्ध पूर्णिमा भगवान गौतम बुद्ध के जीवन की तीन प्रमुख घटनाओं जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण से जुड़ी है। वैशाख पूर्णिमा के दिन ही 563 ईसा पूर्व लुंबिनी में उनका जन्म हुआ।बोधगया में ज्ञान की प्राप्ति हुई और कुशीनगर में 483 ईसा पूर्व उन्होंने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया।
उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध का संदेश आज भी पूरी दुनिया में शांति, करुणा और सहिष्णुता का मार्ग दिखा रहा है।
जापान, चीन, थाईलैंड, श्रीलंका और भूटान सहित अनेक देशों में बौद्ध धर्म का व्यापक प्रभाव है। भारत समेत कई देशों में इसके अनुयायी बड़ी संख्या में हैं। सारनाथ में होने वाले ये आयोजन आस्था के प्रतीक होने के साथ समाज में सकारात्मक सोच, जागरूकता और विश्व शांति के संदेश को भी मजबूत करेंगे।






