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ईरान की इन शर्तों पर खत्म होगी जंग! राष्ट्रपति पेजेशकियन का ऐलान… अधिकारों की मान्यता, मुआवजा और सुरक्षा गारंटी जरूरी

मसूद पेजेशकियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह भी लिखा कि ईरान कम से कम छह हजार साल पुरानी सभ्यता का वारिस, कोई ताकत इस देश का अस्तित्व मिटा नहीं सकी, जो लोग ईरान को खत्म करने का सपना देखते हैं वे इतिहास को नहीं जानते

न्यूज डेस्क, 12 मार्च 2026:

अमेरिका और इजरायल के साथ जारी जंग के बीच ईरान ने पहली बार खुलकर बताया है कि वह किन शर्तों पर युद्ध समाप्त करने को तैयार है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने स्पष्ट कहा है कि संघर्ष खत्म करने का एकमात्र रास्ता तीन अहम शर्तों ईरान के वैध अधिकारों की मान्यता, युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा और भविष्य में किसी भी हमले के खिलाफ ठोस अंतरराष्ट्रीय गारंटी को स्वीकार करना है।

राष्ट्रपति पेजेशकियन ने यह बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दिया। उन्होंने लिखा कि रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बातचीत के दौरान उन्होंने क्षेत्र में शांति के प्रति ईरान की प्रतिबद्धता दोहराई। उनका कहना था कि यह युद्ध जायोनी शासन और अमेरिका द्वारा भड़काया गया है। इसे समाप्त करने का रास्ता केवल कूटनीतिक समाधान ही है।

पेजेशकियन ने कहा कि यदि ईरान के अधिकारों को स्वीकार कर लिया जाए, युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई की जाए और भविष्य में हमलों को रोकने के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा गारंटी दी जाए तभी तेहरान जंग खत्म करने के लिए तैयार है।

इस बीच ईरान ने अपनी ऐतिहासिक पहचान का भी जिक्र करते हुए कड़ा संदेश दिया। पेजेशकियन ने लिखा कि ईरान कम से कम छह हजार साल पुरानी सभ्यता का वारिस है और इतिहास की कठिन परिस्थितियों में भी कोई ताकत इस देश का अस्तित्व मिटा नहीं सकी। उन्होंने कहा कि जो लोग ईरान को खत्म करने का सपना देखते हैं, वे इतिहास को नहीं जानते।

उधर, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के वरिष्ठ नेता अली लारिजानी ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान अमेरिकी धमकियों से डरने वाला नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि इतिहास में कई ताकतें आईं और चली गईं लेकिन ईरानी राष्ट्र कायम रहा।

गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकरों की आवाजाही रोकी गई तो ईरान पर बीस गुना ज्यादा ताकत से हमला किया जाएगा। मालूम हो कि युद्ध के चलते पैदा हुए तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। तेल और गैस की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ने से दुनियाभर में महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है।

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