
लखनऊ, 15 सितंबर 2026:
यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच संगठनात्मक बदलावों से जूझ रही बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की सुप्रीमो मायावती ने राजस्थान के निकाय चुनाव के नतीजों के बहाने पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश की है। मायावती ने दावा किया कि राजस्थान के निकाय चुनाव में बीएसपी के 19 पार्षद चुनाव जीतकर आए हैं जबकि कई उम्मीदवारों को कथित तौर पर सरकारी मशीनरी की गड़बड़ी के कारण दोबारा मतगणना में बेहद कम वोटों के अंतर से हरा दिया गया।
मायावती ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि अगर कथित गड़बड़ियां नहीं हुई होतीं तो राजस्थान में बीएसपी का नतीजा और बेहतर हो सकता था। उन्होंने चुनाव में प्रदर्शन के लिए पार्टी के छोटे-बड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। बीएसपी प्रमुख ने राजस्थान के साथ-साथ पंजाब समेत देश के कुछ अन्य राज्यों में हुए स्थानीय निकाय चुनावों का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि वहां भी पार्टी का प्रदर्शन पहले की तुलना में बेहतर रहा है। मायावती ने उम्मीद जताई कि इन राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों और देश के लोकसभा चुनाव में पार्टी के लोग इससे बेहतर परिणाम हासिल करेंगे।
मायावती का यह बयान ऐसे समय आया है जब यूपी में कुछ ही महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। सभी प्रमुख दल चुनावी तैयारियों में जुटे हैं। बीएसपी के लिए यह चुनाव इसलिए भी अहम है क्योंकि पार्टी पिछले कुछ समय से संगठनात्मक स्तर पर बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है। हाल में मायावती ने अपने भतीजे और पार्टी में कभी नंबर दो माने जाने वाले आकाश आनंद को बीएसपी से बाहर कर दिया। इसके बाद आकाश आनंद के ससुर और पूर्व सांसद ने भी पार्टी नेतृत्व के निर्देश के बाद सक्रिय राजनीति से किनारा कर लिया।
1. राजस्थान में हुये निकाय चुनाव में बी.एस.पी. ने भी इस बार 19 सीटों पर अपने पार्षद जिताकर भेजे हैं और काफी उम्मीदवार सरकारी मशीनरी की गड़बड़ी की वजह से दोबारा गिनती में ज़बरदस्ती थोड़े-थोड़े वोटों के अन्तर से हरा दिये गये हैं, वरना पार्टी का यहाँ और भी अच्छा रिज़ल्ट आ सकता था।…
— Mayawati (@Mayawati) September 15, 2026
ऐसे में राजस्थान के 19 पार्षदों की जीत को सामने रखकर मायावती का कार्यकर्ताओं को बधाई देना महज स्थानीय निकाय चुनाव के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया नहीं अपितु यूपी चुनाव से पहले कैडर को संदेश देने की कवायद के तौर पर भी देखा जा रहा है। मायावती ने संकेत दिया है कि संगठन में बदलावों के बावजूद पार्टी चुनावी मैदान में बेहतर प्रदर्शन का दावा कर रही है।






