लखनऊ, 10 फरवरी 2026:
यूपी को इको टूरिज्म का राष्ट्रीय मॉडल बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सीएम योगी ने प्रदेश में इको-टूरिज्म को रोजगार सृजन, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बताते हुए इसके लिए समग्र और समयबद्ध कार्ययोजना लागू करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी की समृद्ध जैवविविधता, वन क्षेत्र, वेटलैंड, नदियां और प्राकृतिक विरासत इको-टूरिज्म की अपार संभावनाओं से भरी हैं, जिन्हें योजनाबद्ध ढंग से धरातल पर उतारकर प्रदेश की पहचान वैश्विक स्तर पर बनाई जा सकती है।
यूपी इको-टूरिज्म विकास बोर्ड की बैठक में मुख्यमंत्री ने चयनित स्थलों पर अच्छे होटल, स्तरीय रेस्टोरेंट, गुणवत्तापूर्ण आवासीय सुविधाएं और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने गोरखपुर के कुसम्ही जंगल, अयोध्या के कुमारगंज, गाजीपुर के कामाख्या वन पार्क और लखीमपुर खीरी की महेशपुर रेंज को पीपीपी मॉडल के तहत विकसित करने के निर्देश दिए।
इससे निजी निवेश के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हों। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इको-टूरिज्म केवल पर्यटन का साधन नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, ग्रामीण विकास और स्थानीय समुदाय की भागीदारी का मजबूत मॉडल बने। उन्होंने प्रत्येक जिले में सुरक्षित, स्वच्छ और सस्टेनेबल इको-टूरिज्म मॉडल विकसित करने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच दुधवा, पीलीभीत, रानीपुर और कतरनियाघाट टाइगर रिज़र्व समेत प्रमुख वेटलैंड्स में 44 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। अब इको लॉज, फ्लोटिंग रेस्टोरेंट और पर्यटक सुविधाओं के लिए परिसंपत्तियों के मॉनेटाइजेशन पर काम किया जा रहा है।
पर्यटन को गति देने के लिए कनेक्टिविटी सुधार पर भी जोर दिया गया है। लखनऊ-पलिया और नई दिल्ली-पलिया के बीच सप्ताहांत एसी बस सेवा तथा पीलीभीत-मैलानी-बहराइच क्षेत्रीय बस सेवा शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। वर्ष 2025-26 में 31 नई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनमें पार्क, इंटरप्रिटेशन सेंटर, बर्ड वॉचिंग टॉवर, ट्रेल्स और कैंपिंग सुविधाएं शामिल हैं। बोर्ड द्वारा एआई चैटबॉट और मोबाइल ऐप विकसित कर पर्यटकों को स्मार्ट सुविधाएं देने की तैयारी भी की जा रही है।






