लखनऊ, 28 अप्रैल 2026:
यूपी में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को लेकर चलाया जा रहा ‘मिशन शक्ति’ अब महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं अपितु जनआंदोलन का रूप ले चुका है। सीएम योगी की पहल पर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
इस अभियान के तहत कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 यानी ‘पॉश’ के प्रावधानों को आमजन तक पहुंचाया जा रहा है। इस मुहिम में सरकारी और निजी संस्थानों के अधिकारी-कर्मचारी, महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्य, कॉलेज छात्राएं, अधिवक्ता, श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि और स्थानीय समुदाय सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं।
अभियान में विशेषज्ञों द्वारा स्पष्ट किया जा रहा है कि किसी भी प्रकार का शारीरिक, मौखिक या गैरमौखिक व्यवहार महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाता है तो वह यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आता है। कानून के मुताबिक 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है। जिला स्तर पर स्थानीय समिति शिकायतों की सुनवाई करती है।
शिकायत दर्ज कराने की समय-सीमा तीन महीने निर्धारित की गई है। इसे विशेष परिस्थितियों में बढ़ाया भी जा सकता है। जांच प्रक्रिया 90 दिनों के भीतर पूरी करना जरूरी है। पूरे मामले में महिला की पहचान गोपनीय रखना कानूनन अनिवार्य है। दोषी पाए जाने पर नियोक्ता अनुशासनात्मक कार्रवाई या जुर्माना लगाने के लिए बाध्य है।
अभियान केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि महिलाओं के आर्थिक और कानूनी अधिकारों पर भी जोर दिया जा रहा है। मातृत्व अवकाश, समान कार्य के लिए समान वेतन, कार्यस्थल पर स्वास्थ्य और सुरक्षा मानक, श्रमिक कानूनों के तहत विशेष प्रावधान, वित्तीय साक्षरता, बैंकिंग और बीमा योजनाओं तक पहुंच जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं का आर्थिक रूप से सशक्त होना ही उनकी वास्तविक सुरक्षा की सबसे मजबूत नींव है। ऐसे में ‘मिशन शक्ति’ महिलाओं को सुरक्षित वातावरण देने की दिशा में आगे बढ़ने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का मजबूत प्लेटफॉर्म भी तैयार कर रहा है।





