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PCS-2024 में यूपी मॉडल का जलवा : 10 राज्यों के अभ्यर्थियों ने बढ़ाया भरोसा, हर जिले से चमकी प्रतिभा

पारदर्शी चयन प्रणाली बनी राष्ट्रीय आकर्षण का केंद्र, टॉप रैंक में महिलाओं और पिछड़े वर्ग का दमदार प्रदर्शन

लखनऊ, 30 मार्च 2026:

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की पीसीएस-2024 परीक्षा का परिणाम इस बार सिर्फ एक चयन सूची नहीं बल्कि बदलती व्यवस्था और बढ़ते भरोसे की कहानी बनकर सामने आया है। योग्यता, पारदर्शिता और निष्पक्षता के दम पर यूपी की परीक्षा प्रणाली अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना चुकी है।

इस बार की चयन सूची में उत्तर प्रदेश के साथ-साथ देश के 10 अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों की सफलता ने यह साफ संकेत दिया है कि यूपी की प्रतियोगी परीक्षाएं अब पूरे देश के युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी हैं। कुल 932 चयनित अभ्यर्थियों में 92.7% (864) यूपी के हैं। 7.3% (68) अन्य राज्यों से सफलता हासिल करने वाले उम्मीदवार हैं।

राज्यवार आंकड़े भी इस बढ़ते विश्वास की गवाही देते हैं। मध्य प्रदेश (20), हरियाणा (18), बिहार (12) और दिल्ली (9) जैसे राज्यों के अभ्यर्थियों ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इसके अलावा राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब, झारखंड, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ से भी चयन हुआ है।

इस परिणाम की सबसे खास बात यह रही कि प्रदेश के 75 में से 74 जिलों के अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की। यह दर्शाता है कि अब प्रतिभा सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही। छोटे और पिछड़े जिलों से भी उभरकर सामने आ रही है। लखनऊ, प्रयागराज, कानपुर नगर, आगरा और अयोध्या जैसे प्रमुख शैक्षणिक केंद्र टॉप-5 में शामिल रहे। संभल, कन्नौज, कासगंज और महोबा जैसे जिलों ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

वर्गवार चयन में भी संतुलन और समावेशिता साफ दिखी। सामान्य वर्ग से 357, ओबीसी से 270, एससी से 186, ईडब्ल्यूएस से 97 और एसटी वर्ग से 22 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। खास बात यह रही कि टॉप-20 में 8 अभ्यर्थी ओबीसी वर्ग से हैं, जो समान अवसर और प्रतिस्पर्धा का मजबूत संकेत है।

महिला सशक्तिकरण की तस्वीर भी इस परिणाम में स्पष्ट नजर आई। टॉप-5 में 80% महिला अभ्यर्थियों का दबदबा यह साबित करता है कि अब महिलाएं न केवल भागीदारी कर रही हैं, बल्कि शीर्ष स्थानों पर भी मजबूती से अपनी जगह बना रही हैं।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अभ्युदय कोचिंग योजना का प्रभाव भी देखने को मिला। इस योजना के तहत प्रशिक्षित 43 अभ्यर्थियों की सफलता यह दिखाती है कि सही मार्गदर्शन और संसाधन मिलने पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवा भी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।

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