Uttar Pradesh

UP में आस्था के साथ विकास भी: 997 लाख से चमकेंगे मंदिर, 17 परियोजनाओं से बदलेगा पर्यटन का नक्शा

प्रदेश के बुलंदशहर, चंदौली और चित्रकूट में मंदिरों व पर्यटन स्थलों को मिलेगा नया रूप, श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा

लखनऊ, 1 मई 2026:

यूपी में आस्था और विकास को साथ लेकर चलने की नीति अब जमीन पर उतरती दिख रही है। इसी दिशा में पर्यटन विभाग ने बुलंदशहर, चंदौली और चित्रकूट जनपदों में 17 महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए 997 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य धार्मिक स्थलों का कायाकल्प कर वहां बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना है, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके।

बुलंदशहर जनपद में 315 लाख रुपये की 5 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें स्याना क्षेत्र के ऊंचागांव स्थित सिद्ध बाबा (काल भैरव) मंदिर के लिए 52 लाख, खुर्जा के बौद्ध महासभा संस्थान के लिए 88 लाख, डिबाई में मां आशवर देवी मंदिर के लिए 46 लाख, शिकारपुर के बरामऊ स्थित शिव मंदिर के लिए 53 लाख और अनूपशहर के छोटी माता मंदिर के लिए 76 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

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चंदौली में 476 लाख रुपये की 6 परियोजनाएं मंजूर हुई हैं। मुगलसराय क्षेत्र के बिलारीडीह स्थित शंकर मंदिर को 65 लाख, सकलडीहा के पदमनाथपुर हनुमान मंदिर को 70 लाख और सैयदराजा के काली मंदिर को 58 लाख रुपये दिए गए हैं। इसके अलावा चकिया के औरवाटांड में ग्रामीण पर्यटन के लिए 25 लाख, वहीं हनुमान मंदिर के विकास के लिए 114 लाख तथा चहनिया के कॉवर गांव स्थित शक्तिपीठ माता महालक्ष्मी महडौरी देवी मंदिर में बहुउद्देशीय सुविधाओं के लिए 144 लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं।

चित्रकूट जनपद में 206 लाख रुपये की 6 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं। इनमें पालेश्वरनाथ मंदिर पहाड़ी के लिए 80 लाख, सीतापुर खेड़ी चौराहे के पास पर्यटन सुविधा केंद्र के लिए 10 लाख, राम शैया स्थल के लिए 25 लाख, मानिकपुर क्षेत्र के महर्षि वाल्मीकि लालपुर स्थित हनुमान मंदिर के लिए 26 लाख, तमसा गंगा नदी पर वाल्मीकि घाट निर्माण के लिए 50 लाख और लालापुर स्थित महर्षि आश्रम परिक्रमा पथ के लिए 15 लाख रुपये शामिल हैं।

प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि सरकार आस्था और विकास को एक साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने बताया कि इन परियोजनाओं का लक्ष्य अल्पज्ञात धार्मिक स्थलों को विकसित कर उन्हें पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करना है। इससे श्रद्धालुओं की सुविधाएं बढ़ेंगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

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