लखनऊ, 14 जून 2026:
गो संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाली योगी सरकार अब गो सेवा को ग्रामीण समृद्धि और स्वच्छ ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश के गांवों में एक लाख से अधिक घरों में मिनी बायोगैस प्लांट स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की गई है। इस पहल का उद्देश्य गो संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ ग्रामीण परिवारों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और उनकी घरेलू बचत बढ़ाना है।
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव के अनुसार ग्रामीण परिवार अपने घरों पर 25 हजार से 50 हजार रुपये की लागत से मिनी बायोगैस संयंत्र स्थापित कर सकेंगे। इन संयंत्रों के माध्यम से गोबर और अन्य जैविक अपशिष्ट का उपयोग कर स्वच्छ ईंधन तैयार किया जाएगा। इससे रसोई गैस पर होने वाला खर्च काफी हद तक कम हो सकेगा। इसके साथ ही संयंत्रों से निकलने वाली स्लरी किसानों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में उपयोगी होगी।
सीएम योगी के विजन के अनुरूप यह योजना गो संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा और ग्रामीण विकास को एक साथ जोड़ने का प्रयास है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ खेती की लागत में भी कमी आएगी। जैविक खाद के उपयोग से रसायनमुक्त खेती को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीणों को अधिक सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद उपलब्ध हो सकेंगे।
यूपी गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के मुताबिक योजना लागू होने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकेंगे। उन्होंने कहा कि बायोगैस के उपयोग से एलपीजी की खपत कम होगी। इससे घरेलू बजट पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। वहीं, किसानों को जैविक खाद के रूप में अतिरिक्त लाभ मिलेगा। इससे उनकी आय बढ़ाने के नए अवसर भी सृजित होंगे।
उन्होंने कहा कि यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करेगी। गो संरक्षण को आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर गो पालकों के लिए आय के नए स्रोत विकसित होंगे। योगी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना से उत्तर प्रदेश में गो सेवा से समृद्धि का एक नया मॉडल विकसित होने की उम्मीद है। इससे गो संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा और ग्रामीण आत्मनिर्भरता आगे बढ़ेंगे।






