
लखनऊ, 12 जुलाई 2026:
यूपी में रविवार को आयोजित 35 करोड़ पौधरोपण महाअभियान को उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने नई ऊर्जा प्रदान करते हुए ‘हरित उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को मजबूत बनाया। विभाग ने प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों और परियोजनाओं पर लगभग एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया है। अभियान की शुरुआत पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कल्ली पश्चिम में पौधरोपण कर की।
पर्यटन विभाग ने इस महाअभियान को पौधरोपण तक सीमित न रखते हुए इसे दीर्घकालिक पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए पहले से ही सभी चिन्हित स्थलों पर गड्ढों की खुदाई, पौधरोपण स्थलों का विकास, सुरक्षा व्यवस्था और संरक्षण संबंधी तैयारियां पूरी कर ली थीं। विभाग का उद्देश्य पर्यटन स्थलों को अधिक हरित, आकर्षक और पर्यावरण-अनुकूल बनाना है।
अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। वृक्षारोपण महायज्ञ-2026 आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित, स्वच्छ और समृद्ध प्रदेश की मजबूत नींव रखने का अभियान है। उन्होंने कहा कि प्रकृति का संरक्षण ही सतत पर्यटन विकास का आधार है। पर्यटन विभाग मुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री के ‘हरित उत्तर प्रदेश’ के विजन को साकार करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।

अभियान के तहत पीपल, बरगद, नीम, अर्जुन, शीशम, जामुन, आम, महुआ, बेल और आंवला जैसी स्थानीय एवं पर्यावरण अनुकूल प्रजातियों के पौधे लगाए जा रहे हैं। जिन पर्यटन परियोजनाओं में लैंडस्केपिंग प्रस्तावित है वहां नक्षत्र वाटिका, त्रिवेणी वाटिका, हरिशंकरी वाटिका, पंचवटी और नवग्रह वाटिका जैसी थीम आधारित हरित वाटिकाएं विकसित की जाएंगी।
अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम, यूपी प्रोजेक्ट्स कॉरपोरेशन लिमिटेड, उत्तर प्रदेश जल निगम तथा उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड समेत सभी कार्यदायी संस्थाओं को पौधरोपण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। क्षेत्रीय कार्यालयों के लिए भी स्पष्ट लक्ष्य तय किए गए हैं।
लखनऊ, वाराणसी और गोरखपुर को 10-10 हजार, अयोध्या को 8 हजार, बरेली तथा चित्रकूट-झांसी को 5-5 हजार, आगरा और प्रयागराज को 4-4 हजार, मेरठ को 3 हजार तथा अलीगढ़ और बस्ती को 2-2 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया है। अभियान की पारदर्शिता और निगरानी सुनिश्चित करने के लिए हर पौधे की जियो-टैग फोटो विभाग को भेजना अनिवार्य किया गया है।






