Uttarakhand

उत्तराखंड अगेंस्ट नॉइज पॉल्यूशन’ की पहलः ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ अपनाएंगे ये तरीके

नागरिक समूह ने शुरू किया अभियान, ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ जनजागरूकता बढ़ाना और कानूनों का प्रभावी पालन कराना मकसद, सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने बताईं समस्याएं

राजकिशोर तिवारी

देहरादून, 4 जुलाई 2026ः

उत्तराखंड में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ एक नए अभियान ‘उत्तराखंड अगेंस्ट नॉइज पॉल्यूशन’ की शुरुआत की गई है। अभियान का उद्देश्य ध्वनि प्रदूषण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना है। साथ ही होटल, रिसॉर्ट, रेस्तरां, पब, विवाह स्थल और अन्य आयोजनों में होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर मौजूदा कानूनों का प्रभावी पालन कराना है। यह एक नागरिक समूह है।

अभियान के संयोजक अनूप नौटियाल ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि इस पहल के तीन प्रमुख उद्देश्य हैं। पहला, ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ राज्यव्यापी जनजागरूकता अभियान चलाना और विभिन्न जिलों में स्थानीय चैप्टर बनाना। दूसरा, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और आयोजकों को स्वेच्छा से ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए प्रेरित करना व तीसरा, पुलिस, नगर निकायों, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य सरकारी एजेंसियों से नियमों का कड़ाई से पालन कराने की मांग करना।

अभियान के दौरान मालसी क्षेत्र में रहने वाले सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने ध्वनि प्रदूषण से जुड़ी अपनी समस्याएं साझा कीं। मेजर जनरल अतुल रावत (सेनि.), लेफ्टिनेंट कर्नल करुणा थपलियाल (सेनि.), 84 वर्षीय धर्म सिंह रावत आदि का कहना था कि मालसी क्षेत्र में बड़े होटलों से होने वाला ध्वनि प्रदूषण स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। देर रात तक बजने वाले तेज संगीत, आतिशबाजी और निर्माण कार्य से बुजुर्गों, बच्चों और विद्यार्थियों पर पड़ रहे प्रभावों का जिक्र किया।

वक्ताओं ने कहा कि लगातार ध्वनि प्रदूषण से मानसिक तनाव, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और वन्यजीवों पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। समापन सत्र में अनूप नौटियाल, आलोक लाल और जगमोहन मेंदीरत्ता ने प्रदेशवासियों से अभियान से जुड़ने और अपने-अपने क्षेत्रों में स्थानीय चैप्टर गठित करने का आह्वान किया।

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