देहरादून, 7 जून 2026:
देहरादून के बिधौली स्थित यूपीईएस परिसर में आयोजित उत्तराखंड न्यायाधीश संघ के वार्षिक सम्मेलन Judicium 2.0 में न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुलभ और प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सुशासन की मूल भावना तभी पूरी होती है जब समाज के हर तबके को त्वरित और निष्पक्ष न्याय मिल सके।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन की थीम समावेशिता, न्याय तक आसान पहुंच और न्यायिक संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण जैसे अहम विषयों पर केंद्रित है। ये विषय विकसित भारत के संकल्प से भी जुड़े हुए हैं। उनका कहना था कि न्याय व्यवस्था में हर व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान मिलना चाहिए। किसी भी नागरिक के लिए भौगोलिक स्थिति या आर्थिक हालात न्याय पाने में रुकावट नहीं बनने चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में दूरदराज के इलाकों तक न्यायिक सेवाओं की पहुंच बढ़ाना बेहद जरूरी है। न्याय की असली ताकत उसकी निष्पक्षता और समयबद्धता में है। न्याय मिलने में अनावश्यक देरी से लोगों का भरोसा प्रभावित होता है, इसलिए न्यायिक प्रक्रियाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र का एक मजबूत स्तंभ है, जो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के साथ समाज में भरोसा और सुरक्षा का माहौल भी कायम रखती है। कानून के शासन की सफलता न्यायपालिका के प्रति जनता के विश्वास पर निर्भर करती है।
कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की न्यायिक व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं। भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम जैसे नए कानूनों के साथ ई-कोर्ट्स, नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड, डिजिटल केस मैनेजमेंट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी व्यवस्थाओं ने न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार भी न्यायालयों के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने, डिजिटल कोर्ट, ई-फाइलिंग और वर्चुअल सुनवाई की सुविधाओं को विस्तार देने पर लगातार काम कर रही है। राजस्व लोक अदालतों के जरिए लंबे समय से लंबित मामलों के निस्तारण की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने और अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है।
उन्होंने नकल विरोधी कानून, अवैध धर्मांतरण निरोधक कानून, दंगा रोधी कानून और भ्रष्टाचार व अवैध अतिक्रमण के खिलाफ चल रही कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि इन कदमों से कानून का राज और मजबूत हुआ है। महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा और सभी नागरिकों को समान न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लागू समान नागरिक संहिता एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसकी देशभर में चर्चा हो रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जूडिशियम 2.0 सम्मेलन न्याय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुलभ बनाने में उपयोगी साबित होगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड जज एसोसिएशन की कल्याण निधि के लिए 5 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराने की घोषणा की। साथ ही एसोसिएशन की स्मारिका का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता, न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी, न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल, न्यायमूर्ति आलोक मेहरा, न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह, रजिस्ट्रार जनरल योगेश कुमार गुप्ता समेत विभिन्न न्यायालयों के न्यायाधीश मौजूद रहे।






