
देहरादून, 14 जुलाई 2026:
उत्तराखंड में गंगा को साफ रखने की कोशिशों को और मजबूत बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने साफ कहा है कि अब प्रदेश के सभी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की 24 घंटे निगरानी के लिए मजबूत सिस्टम तैयार किया जाए, ताकि कहीं भी लापरवाही की गुंजाइश न रहे। इसके लिए एसटीपी के इनलेट और आउटलेट पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
राज्य सचिवालय में सोमवार को हुई राज्य गंगा समिति की 19वीं बैठक में मुख्य सचिव ने गंगा संरक्षण से जुड़े कई अहम फैसलों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य गंगा समिति और जिला गंगा समितियों की बैठकें तय समय के भीतर नियमित रूप से हों, जिससे लिए गए फैसलों पर समय से काम आगे बढ़ सके।
एक महीने में तैयार होगा रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम
बैठक में मुख्य सचिव ने स्टेट मिशन फॉर क्लीन गंगा (SPMG) को निर्देश दिए कि मुख्यालय स्तर पर लगातार निगरानी के लिए प्रभावी मैकेनिज्म तैयार किया जाए। उन्होंने जिला और राज्य स्तर पर सभी एसटीपी की Real Time Monitoring का सिस्टम अगले एक महीने के भीतर तैयार करने को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि निगरानी सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि तकनीक का पूरा इस्तेमाल हो ताकि हर प्लांट की स्थिति किसी भी समय देखी जा सके।
PCB करेगा औचक निरीक्षण
मुख्य सचिव ने उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) को प्रदेशभर के एसटीपी का समय-समय पर औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि नियमित जांच से प्लांट की कार्यप्रणाली बेहतर होगी और गंगा में प्रदूषित पानी जाने पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
बड़े शहरों के Sewerage Network पर रहेगा फोकस
बैठक में हरिद्वार, रुड़की, ऋषिकेश और देहरादून जैसे बड़े शहरों में सीवरेज नेटवर्क को और मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने कहा कि इन शहरों में तेजी से बढ़ती आबादी को देखते हुए सीवरेज व्यवस्था का विस्तार जरूरी है, ताकि बिना उपचार का गंदा पानी गंगा या उसकी सहायक नदियों तक न पहुंचे।

उपचारित पानी के इस्तेमाल की भी बनेगी योजना
बैठक में एसटीपी से निकलने वाले उपचारित पानी के बेहतर इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि इस पानी का उपयोग सिंचाई, उद्योग और दूसरे उपयोगी कामों में बढ़ाया जाए। इससे एक तरफ साफ पानी की बचत होगी तो दूसरी तरफ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
ये अधिकारी बैठक में रहे मौजूद
बैठक में सचिव रणवीर सिंह चौहान, विशेष सचिव और उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, अपर सचिव रोहित मीणा समेत सभी जिलों के डीएम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुए।






