Uttarakhand

आपदा राहत पर उत्तराखंड को केंद्र का बड़ा सहारा, SDRF की पूरी किस्त जारी, पुनर्निर्माण को 811 करोड़ मंजूर

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय में दिया ब्यौरा, सीएम धामी ने जताया आभार, भूस्खलन पूर्वानुमान सिस्टम मजबूत करने में भी मिलेगा तकनीकी सहयोग, वन भूमि पर पुनर्वास सुप्रीम कोर्ट के तय नियमों के मुताबिक होगा

देहरादून, 8 जुलाई 2026:

उत्तराखंड में लगातार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के बीच केंद्र सरकार ने राज्य को राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए दी जा रही आर्थिक मदद का पूरा ब्यौरा साझा किया है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भेजे पत्र में बताया कि केंद्र सरकार राज्य की आपदा प्रबंधन जरूरतों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और हर जरूरी स्तर पर सहयोग जारी है।

नित्यानंद राय ने कहा कि आपदा प्रबंधन की पहली जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है, लेकिन किसी भी बड़ी आपदा के समय केंद्र सरकार हर संभव मदद उपलब्ध कराती है। राहत और बचाव अभियान के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट के साथ वित्तीय सहायता भी दी जाती है। गंभीर प्राकृतिक आपदाओं में तय प्रक्रिया के तहत अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल की रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) से अतिरिक्त आर्थिक मदद भी जारी की जाती है।

उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए उत्तराखंड को राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) के तहत 1012 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। इसमें 911.20 करोड़ रुपये केंद्र सरकार और 100.80 करोड़ रुपये राज्य सरकार का हिस्सा है। केंद्र सरकार अपनी पूरी हिस्सेदारी दो बराबर किस्तों में पहले ही राज्य को जारी कर चुकी है। वहीं राज्य सरकार के मुताबिक 1 अप्रैल 2025 को SDRF खाते में 2503.07 करोड़ रुपये की शुरुआती राशि भी उपलब्ध थी।

पत्र में वर्ष 2025 में हुई बादल फटने की घटनाओं का भी जिक्र किया गया है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के ज्ञापन का इंतजार किए बिना 8 अगस्त 2025 को अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल का गठन कर दिया था। इस टीम ने 7 से 9 सितंबर 2025 तक प्रभावित इलाकों का दौरा कर नुकसान का आकलन किया। बाद में राज्य सरकार से संशोधित ज्ञापन मिलने के बाद अतिरिक्त आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

पुनर्निर्माण और पुनर्वास के लिए किए जाने वाले Post Disaster Needs Assessment (PDNA) का भी पत्र में उल्लेख किया गया है। उत्तराखंड सरकार ने वर्ष 2025 की प्राकृतिक आपदाओं के बाद PDNA के आधार पर 10,998.95 करोड़ रुपये की सहायता मांगी थी। तय मानकों के अनुसार केंद्र सरकार ने 811.87 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मंजूर की। इसमें केंद्र का हिस्सा 608.90 करोड़ रुपये है। इसकी पहली किस्त के रूप में 182.67 करोड़ रुपये 26 मई 2026 को राज्य सरकार को जारी किए जा चुके हैं।

केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए Landslide Forecast System को और मजबूत करने की भी बात कही है। पत्र के मुताबिक भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) इस दिशा में काम कर रहा है। जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार के अधिकारियों को राष्ट्रीय भूस्खलन पूर्वानुमान केंद्र, कोलकाता भेजकर तकनीकी प्रशिक्षण और अध्ययन भी कराया जा सकता है। वन भूमि पर पुनर्वास से जुड़े मुद्दे पर भी केंद्र ने अपना पक्ष साफ किया है। पत्र में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक वन भूमि का इस्तेमाल केवल तय परिस्थितियों और निर्धारित शर्तों के तहत ही किया जा सकता है।

नित्यानंद राय ने भरोसा जताया कि भारत सरकार उत्तराखंड सरकार के साथ मिलकर आपदा प्रभावित इलाकों में राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के कामों में आगे भी हरसंभव सहयोग देती रहेगी।
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वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से बेहद संवेदनशील राज्य है। हर साल आने वाली आपदाओं से जान-माल के साथ विकास कार्य भी प्रभावित होते हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी बड़ा असर पड़ता है। उन्होंने राज्य को आपदा प्रबंधन के लिए लगातार मिल रही सहायता पर प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री का आभार जताया।

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