Uttarakhand

उत्तराखंड : 13 नदियों के लिए तैयार हुई 120 करोड़ से ज्यादा की DPR, जल स्रोत बचाने की मुहिम तेज

स्प्रिंग एंड रिवर रीजुवेनेशन अथॉरिटी की बैठक, एक जनपद एक नदी अभियान के तहत 13 जिलों में तेजी से चल रहा काम, 4,490 Water Sources की GIS Mapping पूरी, हरिद्वार में भूजल रिचार्ज के लिए नई योजना पर भी चर्चा

देहरादून, 6 जुलाई 2026:

उत्तराखंड में नदियों, धारा-नौलों और दूसरे जल स्रोतों को फिर से जीवंत बनाने की मुहिम अब नई रफ्तार पकड़ रही है। सचिवालय के वीर चंद्रसिंह गढ़वाली सभागार में जलागम सचिव दिलीप जावलकर की अध्यक्षता में स्प्रिंग एंड रिवर रीजुवेनेशन अथॉरिटी (SARRA) की राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति (SLEC) की सातवीं बैठक हुई। बैठक में River Rejuvenation, Groundwater Recharge, जल स्रोत संरक्षण समेत कई अहम योजनाओं की समीक्षा की गई।

बैठक में बागेश्वर की गरुड़ गंगा नदी और पौड़ी की पश्चिमी नयार नदी के विस्तृत परियोजना प्रस्ताव (DPR) पेश किए गए। गरुड़ गंगा के लिए करीब 12 करोड़ रुपये जबकि पश्चिमी नयार नदी के लिए लगभग 48 करोड़ रुपये की योजना पर विभागों ने प्रस्तुतीकरण दिया। एसएलईसी से मंजूरी मिलने के बाद दोनों परियोजनियां अब एनपीसी को भेजी जाएंगी। इनकी कुल लागत करीब 60 करोड़ रुपये है।

प्रदेश सरकार की एक जनपद एक नदी योजना भी लगातार आगे बढ़ रही है। इसके तहत सभी 13 जिलों में एक-एक प्रमुख नदी का चयन कर वैज्ञानिक तरीके से उसके पुनर्जीवन पर काम किया जा रहा है। अब तक 13 नदियों के लिए 120 करोड़ रुपये से ज्यादा की DPR तैयार हो चुकी हैं। कई परियोजनियों पर काम शुरू हो चुका है, जबकि कुछ को उच्च स्तर से मंजूरी भी मिल गई है।

बैठक में बताया गया कि SARRA के भागीरथ ऐप के जरिए पूरे प्रदेश में 4,490 जल स्रोतों की GIS Mapping पूरी हो चुकी है। इनमें धारे, नौले, सहायक नदियां और वर्षा आधारित जल स्रोत शामिल हैं। इसके अलावा 5,775 जल संरचनाओं और जल स्रोतों का डिजिटल डाटाबेस भी तैयार किया गया है।
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प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े धारा-नौलों के संरक्षण पर भी खास जोर दिया जा रहा है। अब तक 697 धारा-नौलों की पहचान की गई है। पहले चरण में ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व वाले 54 धारा-नौलों के संरक्षण और पुनर्जीवन की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इन कामों में स्थानीय लोगों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।

हरिद्वार में भूजल स्तर सुधारने के लिए 49 Artificial Recharge Shaft बनाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। करीब 2.40 करोड़ रुपये की इस परियोजना का मकसद वर्षा जल का ज्यादा से ज्यादा Recharge कर Groundwater Level बेहतर करना है।

बैठक में जानकारी दी गई कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में SARRA के जरिए प्रदेशभर में 86 परियोजनियों पर काम चल रहा है। कई परियोजनियां पूरी हो चुकी हैं, जबकि नई योजनाओं के लिए बजट और मंजूरी की प्रक्रिया जारी है। बैठक में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल बढ़ाने पर भी जोर दिया गया ताकि जल स्रोत संरक्षण, River Rejuvenation और Groundwater Recharge से जुड़े काम और प्रभावी तरीके से आगे बढ़ सकें।

बैठक में परियोजना निदेशक जलागम हिमांशु खुराना, एसीईओ सारा कहकशां नसीम, डेप्युटी डायरेक्टर सारा डीएस रावत, सीएफओ जलागम दीपक भट्ट समेत विभिन्न जिलों के अधिकारी ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए।

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