Uttarakhand

टिहरी लेक को मेगा प्रोजेक्ट से मिलेगी ग्लोबल पहचान, सोलर एनर्जी, कल्चर और टूरिज्म पर होगा फोकस

हाई पावर कमेटी की बैठक में प्रोजेक्ट की नई दिशा पर हुआ मंथन, झील के आसपास उत्तराखंड की कला, संस्कृति और विरासत को मिलेगा नया मंच, बोटिंग, जेटी, म्यूजियम और सोलर बेस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी बनी रणनीति

देहरादून, 10 जुलाई 2026:

टिहरी झील को देश ही नहीं बल्कि दुनिया के बड़े Tourist Destination के तौर पर विकसित करने की तैयारी अब तेज होने लगी है। शुक्रवार को सचिवालय में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में हाई पावर कमेटी की बैठक हुई। बैठक में साफ किया गया कि टिहरी लेक प्रोजेक्ट सिर्फ पर्यटन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे Green Energy, स्थानीय संस्कृति, रोजगार और आधुनिक सुविधाओं के साथ एक मॉडल डेस्टिनेशन के रूप में तैयार किया जाएगा।

बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि टिहरी लेक प्रोजेक्ट को ऐसा नाम दिया जाए जो छोटा, आकर्षक और लोगों की जुबान पर आसानी से चढ़ जाए। उनका कहना था कि किसी भी बड़े प्रोजेक्ट की पहचान उसके मजबूत ब्रांड नाम से भी बनती है, इसलिए इस पर गंभीरता से काम किया जाए।

उन्होंने निर्देश दिए कि भविष्य में होने वाली हाई पावर कमेटी की बैठकों में टीएचडीसी के प्रबंध निदेशक को विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया जाए। साथ ही टिहरी के जिलाधिकारी को भी समिति में शामिल किया जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर फैसलों को तेजी से लागू किया जा सके।

बैठक में सबसे ज्यादा जोर इस बात पर दिया गया कि पूरा प्रोजेक्ट अधिकतम Renewable Energy पर आधारित हो। मुख्य सचिव ने कहा कि क्षेत्र में बनने वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को भी सोलर एनर्जी से चलाने की संभावनाएं तलाशनी चाहिए। इसके लिए अलग से Solar Plant लगाने की योजना तैयार करने को कहा गया।
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टिहरी झील के आसपास के कुछ गांवों को उत्तराखंड की पारंपरिक पहचान से जोड़ने की भी योजना बनाई गई है। इन गांवों को Traditional Village के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां राज्य की लोककला, हस्तशिल्प, संस्कृति और विरासत को करीब से देखने का मौका मिलेगा। इस मॉडल में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने और उनकी आजीविका बढ़ाने पर भी खास फोकस रहेगा। मुख्य सचिव ने कहा कि ऐसा मॉडल आगे चलकर दूसरे पर्यटन स्थलों पर भी लागू किया जा सकता है।

बैठक में यह भी तय किया गया कि प्रोजेक्ट के तहत बनने वाली हर सुविधा के संचालन और रखरखाव की मजबूत व्यवस्था पहले से बनाई जाए। इसके लिए ऐसी गतिविधियां शामिल करने के निर्देश दिए गए, जिनसे नियमित आय होती रहे और स्थानीय हितधारकों को भी फायदा मिले।

टिहरी झील में बोटिंग और जेटी संचालन को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने कहा कि किसी भी नई सुविधा से पहले वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर झील की वास्तविक क्षमता का आकलन किया जाए। इसके बाद पूरी कार्ययोजना तैयार हो। उन्होंने कहा कि निर्माण का काम चरणबद्ध तरीके से किया जा सकता है, लेकिन पूरा मास्टर प्लान एक साथ तैयार होना चाहिए ताकि भविष्य में किसी तरह की दिक्कत न आए।

बैठक में प्रस्तावित म्यूजियम की थीम पर भी चर्चा हुई। निर्देश दिए गए कि इसमें पुरानी टिहरी के ऐतिहासिक महत्व, राजशाही इतिहास, लोककला, लोकसंस्कृति और शहर के पुराने स्वरूप को प्रमुखता दी जाए। इसके साथ ही पुरानी टिहरी का 3D Model तैयार कर पर्यटकों को उस इतिहास से जोड़ने का सुझाव भी रखा गया। बैठक में प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. वी षणमुगम, धीराज सिंह गर्ब्याल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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