Uttar Pradesh

ग्रामीण बेटियों की उड़ान को पंख : बागपत की एस्ट्रोनॉमी लैब में चांद-तारे छूने लगीं छात्राएं

गांव तक पहुंची हाईटेक एस्ट्रोनॉमी लैब, 45 प्रकार के प्रयोग कर अंतरिक्ष के बारे में समझ रहे बच्चे, बागपत के 25 सरकारी विद्यालयों में एआई-संचालित स्मार्ट क्लास से बच्चों को मिल रही आधुनिक शिक्षा

लखनऊ, 18 फरवरी 2026:

यूपी में बालिकाओं की शिक्षा और वैज्ञानिक सोच को मजबूत करने की दिशा में एक प्रेरक कोशिश सामने आई है। सीएम योगी की पहल पर बागपत जनपद के छपरौली ब्लॉक में सरकारी स्कूलों की छात्राओं के लिए अत्याधुनिक एस्ट्रोनॉमी लैब शुरू की गई है। ब्लॉक संसाधन केंद्र परिसर में बनी इस हाईटेक खगोलशास्त्र प्रयोगशाला से ग्रामीण पृष्ठभूमि की बेटियों को विज्ञान की नई दुनिया से जुड़ने का मौका मिल रहा है।

इस प्रयोगशाला में करीब 45 प्रकार के वैज्ञानिक प्रयोगों की सुविधा उपलब्ध है। यहां छात्राएं केवल किताबों में पढ़ने तक सीमित नहीं रहीं बल्कि टेलिस्कोप संचालित करने से लेकर नाइट-स्काई ऑब्जर्वेशन तक खुद प्रयोग कर रही हैं। चंद्रमा और अन्य आकाशीय पिंडों का प्रत्यक्ष अवलोकन करते समय उनके चेहरे पर दिखने वाला उत्साह बताता है कि यह अनुभव उनके भीतर जिज्ञासा और आत्मविश्वास दोनों को बढ़ा रहा है। छपरौली ब्लॉक की लगभग 100 बालिकाएं नियमित रूप से यहां प्रशिक्षण ले रही हैं।

कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, छपरौली की छात्राओं के लिए यह लैब सीखने का नया मंच बन गई है। शिक्षक बताते हैं कि प्रयोग आधारित शिक्षा से बच्चियों की विज्ञान में रुचि तेजी से बढ़ी है और अब वे अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े करियर विकल्पों पर भी गंभीरता से सोचने लगी हैं।

बागपत की डीएम अस्मिता लाल के अनुसार लैब में आधुनिक उपकरणों के साथ एस्ट्रोनॉमी सॉफ्टवेयर का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इससे छात्राएं आकाशीय पिंडों की स्थिति, गति और संरचना को डिजिटल माध्यम से समझ पा रही हैं। उनका मानना है कि इस तरह का व्यावहारिक प्रशिक्षण छात्राओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में मील का पत्थर साबित होगा।

इसी कड़ी में जिले में शिक्षा के आधुनिकीकरण के लिए 25 सरकारी विद्यालयों में एआई-संचालित स्मार्ट क्लास भी शुरू की गई हैं। इन कक्षाओं के जरिए इंटरैक्टिव और तकनीक आधारित पढ़ाई हो रही है। इससे बच्चों की सीखने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार देखा जा रहा है।
ग्रामीण इलाकों में आधुनिक विज्ञान सुविधाओं की यह पहल न सिर्फ बेटियों के सपनों को पंख दे रही है बल्कि भविष्य के वैज्ञानिकों की नींव भी मजबूत कर रही है।

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