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राम मंदिर : चढ़ावे में करोड़ों के खेल का कमेटी करेगी पर्दाफाश… बरामद नकदी से गरमाया मामला

दान संग्रह से बैंक जमा तक पूरी व्यवस्था ऑडिट के दायरे में, सेवानिवृत्त न्यायाधीशों वाली कमेटी को सौंपी गई जिम्मेदारी, संदिग्ध कर्मचारियों की भूमिका खंगाली जा रही, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू, उधर कथित आरोपी कर्मी के घर से नकदी मिलने की खबरों ने मामले को और चर्चा में ला दिया

लखनऊ/अयोध्या, 13 जून 2026:

राम मंदिर में आने वाले दान की रकम को लेकर उठे कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं व इसके पर्दाफाश के लिए कार्रवाई की मांग का दायरा बढ़ता जा रहा है। पीएम को लेटर, सीएम से जांच की मांग और हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल करने के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूरे प्रकरण की तह तक पहुंचने के लिए विशेष जांच कमेटी गठित कर दी है। ट्रस्ट का कहना है कि जांच केवल नकदी गायब होने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दानपात्र से लेकर बैंक खाते में रकम जमा होने तक की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल की जाएगी।

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी के निर्देशन में गठित कमेटी में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के साथ ट्रस्ट और संघ के पदाधिकारियों को भी शामिल किया गया है। लखनऊ में हुई बैठक में इस जांच व्यवस्था को अंतिम रूप दिया गया। शुरुआती जांच में कुछ कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मिलने के बाद उन्हें चिन्हित किया गया है। अब विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

जांच टीम यह पता लगाएगी कि दान की रकम किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के दौरान सिस्टम से बाहर हुई। इसके लिए दान कक्षों में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग, ड्यूटी रोस्टर, नकदी मिलान रजिस्टर, बैंक जमा रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजैक्शन लॉग की जांच की जा रही है। कमेटी इस संभावना को भी परखेगी कि मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित था या फिर इसमें बड़े स्तर पर मिलीभगत हुई।

Ram Mandir Donation Row Major Cash Recovery Details (1)

मामले का एक अहम पहलू सुरक्षा व्यवस्था भी है। जांच के दायरे में यह सवाल भी शामिल किया गया है कि यदि बड़ी रकम कथित तौर पर लंबे समय तक परिसर से बाहर जाती रही तो सुरक्षा तंत्र को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। प्रवेश और निकास व्यवस्था, सुरक्षा कर्मियों की ड्यूटी, निगरानी प्रणाली की कार्यप्रणाली और कैमरा कवरेज की प्रभावशीलता भी जांची जाएगी। किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत सामने आने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

इस बीच मामले ने नया मोड़ तब लिया जब मीडिया रिपोर्टों में आरोपी के तौर पर सामने आए लवकुश मिश्रा के घर से 10 से 12 लाख रुपये बरामद होने की खबरें सामने आईं। बताया जा रहा है कि रुदौली क्षेत्र के मीनापुर ठकुरन फगौली गांव में की गई कार्रवाई के दौरान नकदी बरामद की गई। लवकुश मंदिर में कर्मी के तौर पर कार्यरत रहा है और उस पर दानपात्र के पैसे के गबन का आरोप लगाया गया है।

हालांकि आरोपी के परिवार ने अपने पक्ष में अलग दावा किया है। लवकुश के पिता बच्चूलाल का कहना है कि ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोग उनके घर पहुंचे और वहां रखी नकदी अपने साथ ले गए। उनका कहना है कि फैजाबाद में बन रहे मकान का उनके बेटे से कोई संबंध नहीं है और मकान निर्माण के लिए उन्होंने खेत गिरवी रखे हैं।

उधर विवाद बढ़ने के साथ ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष जांच दल यानी एसआईटी गठित कर मामले की जांच कराने की मांग भी की है। दूसरी तरफ इस प्रकरण को लेकर अदालतों में जनहित याचिका दाखिल होने, संतों द्वारा निष्पक्ष जांच की मांग उठाने और विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाओं के कारण मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। बता दें कि पूर्व सांसद बृजभूषण ने ‘अभी सत्य बोलने का समय नहीं है। मौका आएगा तो बोलूंगा’ कहकर सनसनी मचा दी थी। वहीं महंत कमल नयन दास ने भी ईश्वर दंड देगा कहकर इशारा किया था।

फिलहाल सबसे ज्यादा निगाहें ट्रस्ट की जांच कमेटी पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि अभी तक हो रही लीपापोती के बीच कमेटी की रिपोर्ट से शायद यह साफ हो सकेगा कि दान राशि में कथित गड़बड़ी की असल तस्वीर क्या है, जिम्मेदारी किस स्तर तक जाती है और आगे किन लोगों पर कार्रवाई की तलवार चल सकती है।

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