AyodhyaUttar Pradesh

राम मंदिर ट्रस्ट पर करोड़ों के खेल का आरोप, जमीन खरीद और चढ़ावे को लेकर सपा-कांग्रेस का बड़ा हमला

अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए, अयोध्या में राजनीतिक सरगर्मी तेज, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और संपत्ति खरीद की निष्पक्ष जांच की उठी मांग

अनिल निषाद

अयोध्या, 17 जून 2026:

रामनगरी अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और संचालन से जुड़े मामलों को लेकर सियासी घमासान तेज होता जा रहा है। करोड़ों रुपये के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और जमीन खरीद में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर कांग्रेस के बाद अब समाजवादी पार्टी ने भी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और उसके महासचिव चंपत राय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दोनों दलों ने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है।
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सपा के पूर्व मंत्री पवन पांडे ने बुधवार को अयोध्या में प्रेस वार्ता कर ट्रस्ट पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि ट्रस्ट ने अयोध्या की कई नजूल भूमि और अन्य संपत्तियों को उनकी वास्तविक कीमत से कहीं अधिक मूल्य पर खरीदा है। पांडे के अनुसार आनंद भवन नामक संपत्ति के मालिक रमाकांत पाठक बताए जाते हैं। उसे भी ट्रस्ट ने खरीदा है। उन्होंने आरोप लगाया कि रमाकांत पाठक आपराधिक पृष्ठभूमि के हैं। ऐसे में उनसे संपत्ति खरीदना कई सवाल खड़े करता है।

सपा नेता ने यह भी कहा कि ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारी और उनसे जुड़े लोग जमीन खरीद-फरोख्त में कथित गड़बड़ियों तथा वित्तीय अनियमितताओं में शामिल हो सकते हैं। उनका आरोप है कि राम भक्तों द्वारा श्रद्धा और विश्वास के साथ दिए गए दान और समर्पण निधि का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ट्रस्ट का एक भवन नजूल भूमि पर निर्मित है। इसकी जांच कराई जानी चाहिए।

वहीं, यूथ कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ट्रस्ट पर जमीन खरीद में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया। शुक्ला के मुताबिक वर्ष 2023 में ट्रस्ट ने एक ऐसी जमीन खरीदी जिसकी मालियत एक करोड़ 73 लाख रुपये थी जबकि उसका क्रय मूल्य 29 करोड़ 67 लाख रुपये दर्ज किया गया। इसी तरह दूसरी जमीन की मालियत 9 करोड़ रुपये बताई गई। उसे 55 करोड़ 47 लाख 31 हजार रुपये में खरीदा गया।

कांग्रेस नेता का दावा है कि दोनों जमीनों की खरीद एक ही तारीख को हुई और दोनों संपत्तियां एक ही परिवार से जुड़े लोगों से खरीदी गईं। हालांकि, सपा और कांग्रेस द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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