Uttarakhand

टीबी मुक्त अभियान : जांच में ढिलाई उजागर, 60 फीसदी से नीचे जिलों के डीएम को मिलेगी बैड इंट्री

मुख्य सचिव ने समीक्षा बैठक में धीमी रफ्तार पर जताई नाराजगी, एक हफ्ते में सौ फीसदी स्क्रीनिंग पूरी करने का अल्टीमेटम, मानसून से पहले हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को बर्थ वेटिंग होम में शिफ्ट करने के निर्देश, डीजी हेल्थ को रोजाना मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी, कम प्रदर्शन वाले जिलों पर रहेगा खास फोकस

देहरादून, 19 जून 2026:

टीबी मुक्त भारत अभियान की कुछ जिलों में धीमी रफ्तार पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई समीक्षा बैठक में उन्होंने साफ कहा कि जिन जिलों में मरीजों की सामान्य जांच का आंकलन 60 फीसदी से कम रहा है, वहां के जिलाधिकारियों को प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाए।

मुख्य सचिव ने अभियान की प्रोग्रेस पर नाराजगी जताते हुए अगले एक हफ्ते के भीतर स्क्रीनिंग और सामान्य जांच का काम सौ फीसदी पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पहले उन गांवों पर ध्यान दिया जाए, जहां संक्रमण का खतरा ज्यादा है या जो संवेदनशील श्रेणी में आते हैं।

बैठक में डीजी हेल्थ को अभियान की रोजाना समीक्षा करने के निर्देश दिए गए। कम स्क्रीनिंग वाले जिलों पर खास निगरानी रखने को कहा गया। सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को स्क्रीनिंग बढ़ाने, तय लक्ष्य बनाकर काम करने और अभियान को असरदार तरीके से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

मुख्य सचिव ने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने गर्भावस्था की पहली तिमाही में पंजीकरण बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि इससे हाई रिस्क गर्भावस्था की समय रहते पहचान हो सकेगी और बेहतर इलाज संभव होगा। उन्होंने हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों के प्रबंधन को मजबूत करने, एएनसी जांच बढ़ाने और सभी जिलों में जन्म प्रतीक्षा गृहों की व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर महिला एवं बाल विकास विभाग के वन स्टॉप सेंटर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। मानसून के मद्देनजर दूरदराज इलाकों में चिन्हित हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को पहले से बर्थ वेटिंग होम में शिफ्ट करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि मातृ मृत्यु दर को कम किया जा सके।

बैठक में प्रमुख सचिव एल. फैनाई, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव शैलेश बगौली, नितेश झा, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, चंद्रेश कुमार यादव, डॉ. आर. राजेश कुमार, बृजेश कुमार संत, विनय शंकर पाण्डेय, डॉ. एस. एन. पाण्डेय, विनोद कुमार सुमन, आयुक्त दीपक रावत, आनन्द स्वरूप समेत सभी जिलों के जिलाधिकारी मौजूद रहे।

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