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Save water: पानी की एक-एक बूंद बचाइए, वरना संकट तय- CM योगी का अलर्ट

कम बारिश की आशंका पर पूरे यूपी में जल संरक्षण का मिशन, मानसून सामान्य से कमजोर रहने के संकेत, 'कैच द रेन' अभियान को जनआंदोलन बनाने के निर्देश, अमृत सरोवरों से लेकर सरकारी भवनों तक वर्षाजल संचयन पर जोर

लखनऊ, 22 जून 2026:

यूपी में संभावित कमजोर मानसून और मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पानी की एक भी बूंद व्यर्थ नहीं जानी चाहिए। हर व्यक्ति को जल संचयन व जल संरक्षण के प्रयासों से जोड़ना होगा। सीएम ने पीएम मोदी के आह्वान पर चल रहे ‘कैच द रेन’ अभियान को और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए।

मौसम की स्थिति, मानसून की प्रगति, पेयजल आपूर्ति और भूजल संरक्षण की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में पेयजल संकट उत्पन्न नहीं होना चाहिए। जलापूर्ति व्यवस्था निर्बाध रहे और नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने संभावित कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए सभी विभागों को अग्रिम तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में मौसम विशेषज्ञों ने बताया कि मौसम विज्ञान विभाग के दीर्घावधि पूर्वानुमान के अनुसार इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान उत्तर प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। पूर्वी और पश्चिमी दोनों क्षेत्रों में जून से सितंबर तक सामान्य से कम बारिश के संकेत हैं। जून में भी अधिकांश हिस्सों में कम वर्षा तथा अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है।

मुख्यमंत्री ने सिंचाई, पंचायती राज, भूगर्भ जल, नमामि गंगे, राजस्व और कृषि विभाग को मिलकर समेकित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तालाबों और पोखरों में गांवों का गंदा पानी नहीं जाना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिससे पानी की एक भी बूंद व्यर्थ न जाए। अमृत सरोवरों के संरक्षण, स्वच्छता और नियमित रखरखाव पर विशेष ध्यान देने के साथ सरकारी भवनों को वर्षाजल संचयन का आदर्श मॉडल बनाने के निर्देश भी दिए गए।

भूगर्भ जल विभाग ने बताया कि राज्य में भूजल पुनर्भरण के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। वर्ष 2013 में 113 अतिदोहित विकासखंड थे जो 2025 में घटकर 44 रह गए हैं। अन्य स्रोतों से भूजल पुनर्भरण 30.59 लाख करोड़ लीटर से बढ़कर 35.79 लाख करोड़ लीटर और कुल वार्षिक भूजल पुनर्भरण 69.91 लाख करोड़ लीटर से बढ़कर 73.39 लाख करोड़ लीटर हो गया है।

प्रदेश ने सतत विकास लक्ष्य-6 के तहत भूजल दोहन की दर को 70 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य भी हासिल कर लिया है। पिछले दस वर्षों में 361 विकासखंडों तथा वर्ष 2021 से 2025 के बीच 29 जिलों में भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया।

बैठक में बताया गया कि अटल भूजल योजना, इण्डो-इजराइल बुंदेलखंड जल परियोजना, वर्षाजल संचयन थीम पार्क, रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग और भूजल निगरानी नेटवर्क जैसी योजनाएं प्रभावी परिणाम दे रही हैं। मुख्यमंत्री ने आगामी वर्षों की कार्ययोजना को जल संरक्षण, हरित ऊर्जा और आधुनिक सिंचाई तकनीकों से जोड़ने तथा मौसम विभाग से मानसून की साप्ताहिक रिपोर्ट नियमित रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बैठक में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, नगर विकास मंत्री एके शर्मा और पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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